फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Samvad: हमारे यहां पाठ्यक्रम में सुधार हो रहा है, अच्छी शिक्षा मिलेगी तो छात्र विदेश नहीं जाएंगे: सहस्रबुद्धे

Tue, 03 Sep 2024 09:00 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Amar Ujala Samvad: भारत से बड़ी संख्या में छात्र विदेश पढ़ाई करने जाते हैं। सहस्रबुद्धे ने कहा कि अपने यहां पाठ्यक्रम में सुधार हो रहा है। जब कम संघर्ष में छात्रों को यहीं उच्च दर्जे की शिक्षा मिलेगी, तो वे विदेश जाने के बारे में सोचेंगे ही नहीं।
 
विज्ञापन
पने यहां पाठ्यक्रम में सुधार हो रहा है: संवाद में बोले अनिल सहस्त्रबुद्धे - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Amar Ujala Samvad: देश में बहुत से छात्र 10वीं, 12वीं की पढ़ाई करने के बाद से ही विदेश जाकर पढ़ाई करने की तैयारी शुरू कर देते हैं। इसके लिए कई प्रवासन सेंटर भी है, जो इसमें उनकी मदद करते हैं। खासतौर पर पंजाब में विदेश जाकर पढ़ाई करने का काफी चलन है। जब इस मुद्दे को लेकर डॉ अनिल सहस्रबुद्धे से बात की गई तो उन्होंने इसपर क्या कहा आइए जानते हैं...

विज्ञापन
विज्ञापन

विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट आई है: सहस्रबुद्धे

देश से बहुत सारे छात्र आस्ट्रेलिया, यूके, कनाडा, यूएसए जैसे देशों में जाकर पढ़ाई करते हैं। सहस्रबुद्धे ने बताया कि छात्रों के विदेश जाकर पढ़ाई करने की संख्या में थोड़ी कमी आई है। इसके पीछे कई कारण हैं; जैसे वहां कई तरह के प्रतिबंद लगाए गए हैं, साथ ही इन देशों ने अपनी नीति, नियमों में कुछ बदलाव किया है। इसके साथ ही, वहां जाकर पढ़ाई करना काफी महंगा होता है। जानिए डॉ अनिल सहस्रबुद्धे ने क्यों कहा कि दवाईयों की तरह डिग्रियों पर भी एक्सपायरी डेट होनी चाहिए।

सहस्रबुद्धे ने कहा कि, "अपने यहां पाठ्यक्रम में सुधार हो रहा है। ज्यादा कहेंगे, रोकेंगे कि जाना नहीं चाहिए तो वो सुनेंगे नहीं। जब कठिनाईयां ज्यादा बढ़ेंगी, तब यहां अच्छी शिक्षा मिल रही है तो यहीं रहेंगे ऐसा सोचना शुरू करेंगे।"

उन्होंने आगे कहा, "आस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने भी सोचा होगा कि दूसरे देशों के छात्र अगर यहां ज्यादा संख्या में आएंगे, तो इसका परिणाम उन्हे झेलना होगा। उनके छात्रों को जॉब नहीं मिलेगी, ये लोग जॉब लेकर बैठेंगें। हर देश में लोगों की समस्याएं होती हैं। हर देश के नजरिए में जहां एक जगह अंतरराष्ट्रीयकरण जरूरी है, तो दूसरी जगर स्थानीयकरण भी जरूरी है।"

सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि हमारे देश में जब छात्रों को अच्छी शिक्षा मिलेगी, तो वो बाहर जाने का सोचेंगे ही नहीं। मुझे लगता है कि अंतरराष्ट्रीयकरण में बाहर के विश्वविद्यालयों का यहां आकर और यहां के विश्वविद्यालय वहां जाकर अपने परिसर स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें