विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट आई है: सहस्रबुद्धे
देश से बहुत सारे छात्र आस्ट्रेलिया, यूके, कनाडा, यूएसए जैसे देशों में जाकर पढ़ाई करते हैं। सहस्रबुद्धे ने बताया कि छात्रों के विदेश जाकर पढ़ाई करने की संख्या में थोड़ी कमी आई है। इसके पीछे कई कारण हैं; जैसे वहां कई तरह के प्रतिबंद लगाए गए हैं, साथ ही इन देशों ने अपनी नीति, नियमों में कुछ बदलाव किया है। इसके साथ ही, वहां जाकर पढ़ाई करना काफी महंगा होता है।
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सहस्रबुद्धे ने कहा कि, "अपने यहां पाठ्यक्रम में सुधार हो रहा है। ज्यादा कहेंगे, रोकेंगे कि जाना नहीं चाहिए तो वो सुनेंगे नहीं। जब कठिनाईयां ज्यादा बढ़ेंगी, तब यहां अच्छी शिक्षा मिल रही है तो यहीं रहेंगे ऐसा सोचना शुरू करेंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "आस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने भी सोचा होगा कि दूसरे देशों के छात्र अगर यहां ज्यादा संख्या में आएंगे, तो इसका परिणाम उन्हे झेलना होगा। उनके छात्रों को जॉब नहीं मिलेगी, ये लोग जॉब लेकर बैठेंगें। हर देश में लोगों की समस्याएं होती हैं। हर देश के नजरिए में जहां एक जगह अंतरराष्ट्रीयकरण जरूरी है, तो दूसरी जगर स्थानीयकरण भी जरूरी है।"
सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि हमारे देश में जब छात्रों को अच्छी शिक्षा मिलेगी, तो वो बाहर जाने का सोचेंगे ही नहीं। मुझे लगता है कि अंतरराष्ट्रीयकरण में बाहर के विश्वविद्यालयों का यहां आकर और यहां के विश्वविद्यालय वहां जाकर अपने परिसर स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू होगी।