देश की स्कूली शिक्षा प्रणाली में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। बच्चों को जिंदगी में आने वाले उतार-चढ़ाव से निपटने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। ताकि देश के स्कूलों में भविष्य के लीडर तैयार हो सकें। स्कूल में बच्चों को तनाव दूर भगाने और मानसिक सुदृढ़ता के लिए आध्यात्मिक शिक्षा और विपरीत परिस्थितियों में गुजर-बसर करने एवं आजीविका के लिए बुनियादी कृषि प्रशिक्षण आदि की पहल की जा रही है। इसी क्रम में जहां पूर्वी दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत आने -वाले स्कूलों में बच्चों साग-फल-सब्जी लगाने आदि का प्रशिक्षण दिया जाने लगा है तो वहीं, हरियाणा में कॉलेज-विश्वविद्यालयों के बाद अब स्कूलों में भी गीता ज्ञान देने की योजना है।
पूर्वी दिल्ली नगर निगम की ओर से संचालित स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कृषि और बागवानी का पाठ पढ़ाया जाएगा। इसके लिए 30 स्कूलों में किचन गार्डन तैयार किए गए हैं। जल्द ही ऐसा निगम के सभी स्कूलों में किया जाएगा।
हरियाणा के स्कूलों में अगले शैक्षणिक सत्र से छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ ही गीता ज्ञान भी मिलेगी। स्कूलों में बच्चों को श्रीमद्भागवद्गीता के 'श्लोक' सुनाना सिखाया जाएगा। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कुरुक्षेत्र में चल रहे अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में इसकी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता से संबंधित पुस्तकें कक्षा 5वीं और 7वीं के पाठ्यक्रम का हिस्सा बन जाएंगी। उन्होंने अपील की कि युवाओं को गीता के सार को अपने जीवन में उतारना चाहिए क्योंकि पवित्र ग्रंथ का संदेश केवल अर्जुन के लिए नहीं बल्कि हम सभी के लिए दिया गया है।