क्यों रोका गया था बोर्ड एग्जाम देने से ?
छात्रा ने समय पर डोमिसाइस सर्टिफिकेट अपलोड नहीं किया था, जिसके कारण सीबीएसई ने छात्रा को 10वीं बोर्ड एग्जाम में शामिल होने से रोका। जबकि बोर्ड ने छात्रा का एडमिट कार्ड जारी कर दिया था, लेकिन जब वह अपनी परीक्षा देने एग्जाम सेंटर पहुंची तो उसे एग्जाम हॉल के बाहर ही रोक दिया गया था। इस वजह से छात्रा अपनी परीक्षा नहीं दे पाई थी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा ?
हाई कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सीबीएसई को फटकार लगाते हुए कहा, "यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उम्मीद है कि सीबीएसई भविष्य में छात्रों के परीक्षा में बैठने के अधिकार को लेकर और अधिक सतर्क रहेगा।"
न्यायमूर्ति हरि शंकर ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा, "10वीं कक्षा की छात्रा के लिए प्रवेश पत्र पहले ही जारी किया जा चुका था। जब वह परीक्षा देने पहुंची तो उसे परीक्षा हॉल के बाहर खड़ा कर दिया गया। यह अमानवीय व्यवहार है।"
छात्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि छात्रा को उसका छूटा हुआ पेपर पूरा करने का मौका दिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि उसे परीक्षा लिखने के लिए अन्य छात्रों के समान ही समय मिले। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अन्य छात्र को, जिसे समय पर अधिवास प्रमाण पत्र अपलोड नहीं करने के कारण परीक्षा हॉल में प्रवेश करने से रोक दिया गया था, उसे समान शर्तों के तहत परीक्षा देने की अनुमति दी जानी चाहिए।