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CBSE: बोर्ड ने छात्रा को परीक्षा से रोका, दिल्ली HC ने लगाई फटकार; कहा - ऐसा करना 'अमानवीय'

Wed, 28 Feb 2024 04:58 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

CBSE: सीबीएसई ने एक छात्रा को परीक्षा देने से रोक दिया था। छात्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि छात्रा का एडमिट कार्ड जारी करने के बाद छात्र को परीक्षा हॉल में एंट्री देने से रोकना गलत है। कोर्ट ने इसे अमानवीय व्यवहार बताया।
 
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Delhi high court - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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CBSE Board Exam 2024: सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई 10वीं क्लास की छात्रा को बोर्ड एग्जाम से रोकने पर फटकार लगाई है। दरअसल, 10वीं क्लास की छात्रा को सीबीएसई ने बोर्ड एग्जाम देने से रोक दिया था। जिसको लेकर छात्रा ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सोमवार को एक उल्लेखनीय फैसले में, दिल्ली हाईकोर्ट ने 10वीं कक्षा की एक छात्रा की शिकायत का समाधान करते हुए उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी।

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क्यों रोका गया था बोर्ड एग्जाम देने से ?

छात्रा ने समय पर डोमिसाइस सर्टिफिकेट अपलोड नहीं किया था, जिसके कारण सीबीएसई ने छात्रा को 10वीं बोर्ड एग्जाम में शामिल होने से रोका। जबकि बोर्ड ने छात्रा का एडमिट कार्ड जारी कर दिया था, लेकिन जब वह अपनी परीक्षा देने एग्जाम सेंटर पहुंची तो उसे एग्जाम हॉल के बाहर ही रोक दिया गया था। इस वजह से छात्रा अपनी परीक्षा नहीं दे पाई थी।
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हाईकोर्ट ने क्या कहा ?

हाई कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सीबीएसई को फटकार लगाते हुए कहा, "यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उम्मीद है कि सीबीएसई भविष्य में छात्रों के परीक्षा में बैठने के अधिकार को लेकर और अधिक सतर्क रहेगा।"

न्यायमूर्ति हरि शंकर ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा, "10वीं कक्षा की छात्रा के लिए प्रवेश पत्र पहले ही जारी किया जा चुका था। जब वह परीक्षा देने पहुंची तो उसे परीक्षा हॉल के बाहर खड़ा कर दिया गया। यह अमानवीय व्यवहार है।"

छात्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि छात्रा को उसका छूटा हुआ पेपर पूरा करने का मौका दिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि उसे परीक्षा लिखने के लिए अन्य छात्रों के समान ही समय मिले। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अन्य छात्र को, जिसे समय पर अधिवास प्रमाण पत्र अपलोड नहीं करने के कारण परीक्षा हॉल में प्रवेश करने से रोक दिया गया था, उसे समान शर्तों के तहत परीक्षा देने की अनुमति दी जानी चाहिए।
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