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CBSE Results Controversy: सीबीएसई टर्म 1 रिजल्ट पर उठे सवाल, निजी स्कूल एसोसिएशन ने बोर्ड से लगाई गुहार

Wed, 23 Mar 2022 06:56 AM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

CBSE Term 1 Results Controversy : सीबीएसई द्वारा स्कूलों को ई-मेल के जरिये छात्रों की परफोर्मेंस यानी प्रदर्शन से अवगत कराया गया था, लेकिन अब इसी परफोर्मेंस असेसमेंट पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध निजी स्कूलों की एक संस्था ने टर्म-1 परीक्षा के मूल्यांकन के तौर-तरीकों और रिजल्ट में हेरा-फेरी का आरोप लगाया है। 
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CBSE Term 1 Results Controversy - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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CBSE Term 1 Results Controversy: सीबीएसई की ओर से नए फॉर्मूले के तहत आयोजित की गई कक्षा 10वीं और 12वीं की टर्म-1 परीक्षाओं के परिणाम हाल ही में जारी किए गए थे। सीबीएसई द्वारा स्कूलों को ई-मेल के जरिये छात्रों की परफोर्मेंस यानी प्रदर्शन से अवगत कराया गया था, लेकिन अब इसी परफोर्मेंस असेसमेंट पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध निजी स्कूलों की एक संस्था ने टर्म-1 परीक्षा के मूल्यांकन के तौर-तरीकों और रिजल्ट में हेरा-फेरी का आरोप लगाया है। संस्था की ओर से इस संबंध में सीबीएसई के अध्यक्ष को पत्र भी लिखा गया है। 

सीबीएसई टर्म-1 की मॉर्किंग में अनुचित प्रक्रियाओं का इस्तेमाल

नेशनल प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस (NPSC) की ओर से सीबीएसई अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में रिजल्ट मूल्यांकन में हेर-फेर और कदाचार की बात कही गई है।
एनपीएससी ने आरोप लगाते हुए कहा कि कई स्कूलों ने टर्म-1 परीक्षाओं के लिए छात्रों की मॉर्किंग करते समय अनुचित प्रक्रियाओं का प्रयोग किया है और मूल्यांकन में कदाचार हुआ है। स्कूलों की ओर से परीक्षार्थियों का ईमानदारी के साथ मूल्यांकन नहीं किया गया। 

 

कई छात्रों को एकाधिक विषयों में पूरे-पूरे अंक मिले

सीबीएसई द्वारा कक्षा 10वीं और 12वीं के टर्म-1 रिजल्ट जारी करने के बाद सामने आए इस पत्र में दावा किया गया है कि यह देखा गया कि होम सेंटरों पर यानी स्कूल आधारित परीक्षा केंद्र पर आयोजित की जाने वाली टर्म-1 परीक्षाओं के दौरान, कई स्कूलों ने अनुचित तरीके अपनाए हैं और कदाचार किया है।
नतीजतन, इन स्कूलों के कई छात्रों ने अधिकांश विषयों में पूरे-पूरे अंक प्राप्त किए हैं। पत्र में कहा कहा गया है कि हमें यकीन है कि सीबीएसई को भी इस मुद्दे पर इसी तरह की प्रतिक्रियाएं मिली हैं।

 

होनहार विद्यार्थियों का मनोबल भी तोड़ा

195 निजी स्कूलों की एसोसिएशन एनपीएससी ने तर्क दिया कि कुछ स्कूलों के इस कदम ने ईमानदारी और सत्यता के साथा परीक्षाओं का आयोजन करने वाले स्कूलों पर गलत प्रभाव डाला है। वहीं, कठिन परिश्रम करने वाले होनहार विद्यार्थियों का मनोबल भी तोड़ा है। इसलिए, टर्म-1 के परिणामों के स्कूलों का प्रदर्शन असमान रहा है।

 

एसोसिएशन ने किया वेटेज कम करने का आग्रह

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष विनीत जोशी को लिखे पत्र में, एनपीएससी के बैनर तले कुछ निजी स्कूलों ने सीबीएसई से 2021-2022 सत्र के लिए टर्म-1 परीक्षा के वेटेज को कम करने का आग्रह किया है।
एनपीएससी ने सुझाव दिया कि टर्म-1 परीक्षा का वेटेज 20 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक कम किया जाना चाहिए, जबकि टर्म-2 परीक्षा का वेटेज बढ़ाकर 70 प्रतिशत से 80 प्रतिशत कर देना चाहिए। 

 

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मार्किंग वेटेज टर्म-2 के रिजल्ट के वक्त तय किया जाएगा

पत्र में याद दिलाया गया है कि पिछले साल, सीबीएसई ने घोषणा की थी कि 2022 के लिए बोर्ड परीक्षाएं दो शर्तों में आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही सीबीएसई ने कहा था कि टर्म-1 और टर्म-2 परीक्षाओं का वेटेज टर्म-2 के परिणाम की घोषणा के समय तय किया जाएगा और तदनुसार, अंतिम प्रदर्शन यानी फाइनल रिजल्ट तैयार किया जाएगा। इसलिए, स्कूल एसोसिएशन ने सीबीएसई से टर्म-1 परीक्षा का वेटेज कम करने का आग्रह किया है।
 
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