शिक्षक हों, अभिभावक या फिर कोई प्रशासनिक कर्मचारी, अब कोई भी स्कूलों में गुस्सा नहीं कर सकेगा। इस संबंध में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE - Central Board of Secondary Education) ने जरूरी दिशानिर्देश जारी किया है।
सीबीएसई ने सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों से कहा है कि वे खुद को क्रोध मुक्त जोन (Anger Free Zone) बनाएं। ऐसी जगह जहां शिक्षक, अभिभावक व प्रशासनिक अधिकारी सभी अपने गुस्से पर नियंत्रण करने की कोशिश करेंगे और बच्चों के लिए अच्छा उदाहरण पेश करेंगे। इस तरह से बच्चों को 'गुस्से से आजादी' (Freedom from Anger) का मोल समझाएंगे।
बोर्ड का कहना है कि इससे विद्यार्थियों को मानसिक तौर पर सक्रिय और भावनात्मक रूप से स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी। वे ऊर्जावान और खुश होकर घर जा सकेंगे और अगले दिन वापस स्कूल आना भी चाहेंगे।
ये भी पढ़ें : भूत विद्या से लेकर अच्छा पति-पत्नी बनाने वाले कोर्स तक, ये हैं दुनिया के अजीबोगरीब पाठ्यक्रम
सीबीएसई ने इस संबंध में सभी संबद्ध स्कूलों को परामर्शी जारी की है। साथ ही ये भी कहा कि स्कूलों को इस प्रयोग का अनुभव अपने रिकॉर्ड में रखना है और उसके बारे में सोशल मीडिया पर हैशटैग सीबीएसई नो एंगर (#cbsenoanger) के साथ बताना है।
स्कूलों को अपने परिसर में बोर्ड लगाना है जिसपर लिखा होगा - 'यह क्रोध मुक्त क्षेत्र है (his is an Anger-Free Zone)।'
ये भी पढ़ें : साल 2020 में स्कूलों में कब-कब होंगी छुट्टियां, जारी हुई अवकाश तालिका