मीडिया को दिए बयान में शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि राज्यों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर परीक्षा आयोजित करने पर आम सहमति बनी है। हालांकि अंतिम फैसले की घोषणा शिक्षा मंत्री द्वारा 1 जून को की जाएगी।
कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई आज शिक्षा मंत्रालय के बाहर बारहवीं बोर्ड परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने जा रहे हैं। एनएसयूआई का कहना है कि विशेषज्ञों द्वारा कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों को सबसे ज्यादा खतरे की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को देखते हुए परीक्षाओं को रद्द कर देना चाहिए।
रविवार को आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में बारहवीं बोर्ड परीक्षा आयोजित करने की आहट मिलते ही तकरीबन 300 छात्रों ने परीक्षाएं रद्द करने की मांग की है। विद्यार्थियों ने प्रधान न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना को पत्र भेजकर यह आग्रह किया है कि वह सीबीएसई द्वारा ऑफलाइन परीक्षाएं आयोजित करने की जगह वैकल्पिक मूल्यांकन की योजना बनाने का निर्देश दें।