Topic: Sustainability New Mantra of StartUp
Guest: Sameer Panda, CEO & Co-Founder TJ Tyres
सफलता.कॉम द्वारा स्टार्टअप के नए मंत्र स्थिरता विषय पर आयोजित मास्टर क्लास सत्र में टीजे टायर्स के सीईओ एवं को-फाउंडर समीर पंडा ने कहा कि आज के समय में जो स्टार्टअप्स गायब हो रहे हैं उसके लिए कहीं न कहीं को फाउंडर्स की भूमिका को जिम्मेदार माना जा सकता है। क्योंकि जब स्टार्टअप्स की निर्भरता को-फाउंडर्स पर ज्यादा होती है। तब आप स्टार्टअप्स को बहुत लंबा नहीं खींच सकते हैं।
अगर आप कोई स्टार्टअप चला रहे हैं तो लंबे समय तक तभी चला सकते हैं कि जब आपके पास पूरा प्लान हो। साथ ही स्टार्टअप कोई रातो रात सफल नहीं हो जाते। स्टार्टअप्स को सफल होने में वक्त लगता है। ये वक्त 5 साल, 10-12 साल या 20 साल भी हो सकता है।
उन्होंने कहा कि एक स्टार्टअप शुरू करते समय विषय का चुनाव, को-फाउंडर्स का सही चुनाव बहुत जरूरी है। साथ ही अगर आप कोई स्टार्टअप चला रहे हैं और शुरू से ही प्रोफिट को लेकर कोई प्लान नहीं है तो चाहे जितनी फंडिंग आपको मिल जाए काम नहीं आएगी। एक रेगुलर प्राफिट इनकम स्टार्टअप से आना बहुत जरूरी है।
जैसे कोई प्रोडक्ट 80 रुपये में बना और सर्विस चार्ज लगाकर आप उसे 150 में बेच रहे हैं या 125 में बेच रहे हैं तो ठीक है। फंडिंग मिलने में परेशानी नहीं होगी। स्टार्टअप की सफलता में भाग्य का भी हाथ होता है।
आज के समय में अगर आप सस्टेनेबल स्टार्टअप चलाना चाहते हैं तो आपके प्रोडक्ट का इनवायरमेंट फ्रेंडली होना जरूरी है। ये तय है कि सस्टेनेबिलिटी वाले स्टार्टअप आगे चलकर बहुत बड़ा बन सकते हैं। आज के समय में बड़ी बड़ी कंपनियां सस्टेनेबेलिटी के आधार पर चल रहीं हैं जैसे टेस्ला।
आजकल आप चाहे किसी भी बड़े स्टार्टअप को ले लो सभी सस्टेनेबेलिटी पर काम कर रहे हैं। आप चाहे फ्लिपकार्ट की बात करें या अमेजन की या जोमैटो की। ये सभी स्टार्टअप्स अपने प्रोसेस में कार्बन फुट प्रिंट्स को कम करने पर काम कर रहे हैं। साथ ही ई-कॉमर्स सेगमेंट में काम करे हर स्टार्टअप ने डिलीवरी के लिए इलेक्ट्रिक वेहिकल का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
1-व्यवसाय : इसके लिए प्रोफिटेबिलिटी जरूरी है।
2-पर्यावरण : इसमें पर्यावरण फ्रेंडली न्यू टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना होता है।
समीर का कहना है कि आज के समय़ में युवाओं की सोच बहुच उन्नत है वो नवाचार करने में आगे हैं। 20-25 साल के युवाओं का माइंड फर्टाइल होता है वो नई चीजों को पसंद करते हैं उन्हें घिसे पिटे आइडिया पसंद नहीं आते। अगर ऐसे युवा किसी समस्या को देखते हैं और नए नवाचार से उसे दूर करने की कोशिश करते हैं तो यही युवा समाज के लिए एक बेहतर समाधान लेकर आते हैं।
बड़ी बड़ी कंपनियों में उच्च पदों पर दर्जनों अधिकारी होते हैं। लेकिन स्टार्टअप में ऐसा नहीं होता। उसमें जब आप इंटर्न भी करते हो तो सीधे आप जाके सीईओ से बात कर लोगे। साथ ही स्टार्टअप्स में टीम छोटी होती है तो आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी युवा को स्टार्टअप शुरू करना है तो कम से कम 1 साल उसे इंटर्नशिप को देना चाहिए। अगर एक डेढ़ साल में आप दो तीन कंपनी में इंटर्नशिप करते हैं तो आपको बहुत सारे आइडिया मिल जाते हैं। साथ ही आपको ये पता चलता है कि कंपनी में किस तरह की समस्याएं होती है। एक स्टार्टअप लगाने के लिए आपको किन किन चीजों की जरूरत होगी। आप स्टार्टअप कर सकते हो या नहीं कर सकते हो ये भी आप वहीं सीखोगे।
समीर ने कहा कि बिना प्रॉब्लम के आप सॉल्यूशन यानि स्टार्टअप कैसे लगा पाएंगे। तो स्टार्टअप शुरू करने से पहले आपको प्रॉब्लम ढूंढ़ना चाहिए। अगर आप मार्केट में घूमोगे, 20-25 लोगों से बात करोगे तो आपको 20 तरह के प्रॉब्लम दिख जाएंगे। उनमें से कौन सा प्रॉब्लम ऐसा है जिसके जवाब में लंबे समय तक काम किया जा सकता है। यानी ऐसा प्रॉब्लम जिसे सॉल्व करते करते आपका जीवन निकल जाए लेकिन फिर भी आप पूरे मार्केट को कैप्चर न कर पाएं। आपके लिए वही समस्या होगी स्टार्टअप शुरू करने की।