कक्षाएं लगभग खाली
अधिकारी ने बताया कि हाल ही में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई औचक जांच में पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों के कई सरकारी स्कूलों में 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा की कक्षाएं लगभग खाली थीं। अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "हमारी टीम के सदस्य यह जानकर हैरान रह गए कि कक्षा 9 और 11 में दस प्रतिशत से भी कम छात्र मौजूद थे, जबकि 10वीं और 12वीं कक्षा में उपस्थिति पांच प्रतिशत से भी कम थी।
औचक निरीक्षण किया गया
अधिकारियों ने 26 अगस्त को गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल के ग्रामीण स्कूलों का औचक निरीक्षण किया था। अधिकारी ने बताया कि अधिकारी उनके दौरे के निष्कर्षों का विश्लेषण कर रहे हैं। हम बच्चों को स्कूलों में लाने का तरीका खोजने के लिए प्रधानाचार्यों और अभिभावकों के साथ भी बातचीत कर रहे हैं।
शिक्षा मंत्री क्या बोले?
बिहार में 42,573 प्राथमिक, 25,587 उच्च प्राथमिक, 2,286 माध्यमिक और 2,217 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं। विभाग के निष्कर्षों के बारे में पूछे जाने पर बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने पीटीआई से कहा, मुझे इस बात की जानकारी है। मुझे यकीन है कि यह परिदृश्य जल्द ही बदलेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में हमारी सरकार ने शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और अभिभावकों को इस समस्या का समाधान खोजना होगा। उन्होंने कहा कि कृपया मुझे स्थिति में सुधार के लिए सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर न करें।
अन्य जिलों में भी होगा निरीक्षण
एक अन्य अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी कि इसी तरह की कवायद जल्द ही सारण, सीवान, गोपालगंज और वैशाली जिलों में किए जाने की उम्मीद है। विभाग ने हाल ही में राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्हें जनवरी 2023 से छात्रों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली शुरू करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों की उपस्थिति में सुधार के लिए भी कई उपाय किए जा रहे हैं।
36.5 प्रतिशत छात्र माध्यमिक शिक्षा पूरी करने में असमर्थ
राज्य के बजट में सर्वाधिक आवंटन का प्रावधान शिक्षा के लिए किया गया है। मंत्री ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में इसके लिए कुल मिलाकर 51,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। बिहार आर्थिक सर्वेक्षण (2021-22) के अनुसार, कक्षा -1 में नामांकित लगभग 36.5 प्रतिशत छात्र अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी करने में असमर्थ हैं। उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने वाले छात्रों का अनुपात और भी कम है।
सर्वेक्षण में क्या बताया गया?
छात्रों की उच्च नामांकन दर अधिक महत्व नहीं रखती है यदि ड्रॉपआउट दर भी अधिक है। जरूरी शिक्षा को पूरा करने से पहले पर्याप्त रूप से छोड़ने की घटना बिहार में एक समस्या है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि ऐसे ड्रॉपआउट के पीछे के सभी कारकों को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों- आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक, और स्कूली पर्यावरण और बुनियादी ढांचे के तहत बांटे जा सकते हैं। बिहार के मामले में, ये सभी कारक अलग-अलग डिग्री में काम कर रहे हैं।