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आंध्र प्रदेश बोर्ड : सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद रद्द कीं कक्षा 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाएं

Thu, 24 Jun 2021 08:37 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की एक विशेष पीठ ने 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा आयोजित करने के फैसले पर आंध्र सरकार से कड़े सवाल किए और राज्य के स्थायी वकील को कहा, हम परीक्षा आयोजित करने के लिए आपके द्वारा उठाए जा रहे एहतियाती उपायों से संतुष्ट नहीं हैं।
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परीक्षा की प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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आंध्र प्रदेश सरकार ने कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा रद्द कर दी है, शिक्षा मंत्री ए सुरेश ने गुरुवार को यह जानकारी दी। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार को चेतावनी दिए जाने के कुछ ही घंटों बाद आया है। बोर्ड परीक्षाओं से जुड़ीं याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि परीक्षा के मामले में एक भी मौत हुई तो राज्य सरकार जिम्मेदार होगी। इससे पहले आंध्र प्रदेश सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया था कि वह राज्य में बोर्ड परीक्षाओं के आयोजन की तैयारी कर रही है।

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दिन में सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश को बताया कि वह कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा आयोजित करने के लिए राज्य द्वारा सुझाए गए एहतियाती उपायों के बारे में आश्वस्त नहीं है और कहा कि जब तक संतुष्ट नहीं होगा कि कोविड के कारण कोई मृत्यु नहीं होगी, यह उन्हें अनुमति नहीं देगा। अदालत ने यह भी कहा कि वह कई अन्य राज्यों की तरह मृत्यु के मामले में मुआवजे के पहलू पर भी गौर कर सकती है जहां संक्रमण के कारण मौत के लिए एक करोड़ रुपये दिए जाते हैं।

न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की एक विशेष पीठ ने 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा आयोजित करने के फैसले पर आंध्र सरकार से कड़े सवाल किए और राज्य के स्थायी वकील को कहा, हम परीक्षा आयोजित करने के लिए आपके द्वारा उठाए जा रहे एहतियाती उपायों से संतुष्ट नहीं हैं। अदालत ने कहा कि आपके द्वारा तैयार किए गए तंत्र से हम आश्वस्त नहीं हैं। जब तक हम संतुष्ट नहीं हो जाते कि आप बिना किसी मौत के परीक्षा आयोजित करने में सक्षम हैं, हम आपको परीक्षा आयोजित करने की अनुमति नहीं देंगे। पीठ ने कहा था कि हमें परीक्षा के दौरान किसी भी मौत के मामले में मुआवजे के पहलू को देखना होगा। कुछ राज्यों ने  कोविड-19 के कारण मृत्यु के लिए 1 करोड़ का मुआवजा दिया है।  
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बता दें कि शीर्ष अदालत उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें राज्य सरकारों को महामारी के मद्देनजर बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान, अदालत ने परीक्षा के लिए 5,19,510 छात्रों को कक्षाओं में समायोजित करने पर अपनी विशेष चिंता व्यक्त की और कहा कि राज्य सरकार का कहना है कि एक कक्ष में अधिकतम 15 से 18 छात्र होंगे। पीठ ने कहा कि अगर हम आपके आंकड़े पर जाएं तो प्रति कक्ष 15 छात्रों के लिए, आपको 34,644 कमरों की आवश्यकता होगी और यदि हम प्रति कक्ष 18 छात्रों को लेते हैं तो आपको 28,862 कमरों की आवश्यकता होगी। हमें बताएं कि आपको ये सभी कमरे कहां से मिलते हैं।

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