अकादमिक परिषद की बैठक में मिली मंजूरी
केंद्रीय विश्वविद्यालय की ओर से सीमित संख्या में पाठ्यक्रमों के लिए सीयूईटी का उपयोग करने की मांग की गई थी, लेकिन केंद्र सरकार ने विशेष छूट की मांग को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद यूनिवर्सिटी के शीर्ष शैक्षणिक निकाय यानी अकादमिक परिषद ने 2022-23 के नए शैक्षणिक सत्र से यूजी डिग्री पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के उपयोग को मंजूरी दे दी। एएमयू अकादमिक परिषद की बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने की।
विश्वविद्यालय के पूर्व प्रावधान और नियम बरकरार रहेंगे
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा जारी बयान में बताया गया कि उच्च शिक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की ओर से प्राप्त जानकारी और स्पष्टीकरण के आधार पर अकादमिक काउंसिल ने चर्चा की और तय किया कि विश्वविद्यालय सीयूईटी के टेस्ट स्कोर का उपयोग करेगा। हालांकि, इसके बावजूद विश्वविद्यालय की आंतरिक आरक्षण नीति, विभिन्न श्रेणियों के लिए कुलपति के नामांकन अधिकार और ब्रिज कोर्स तथा मदरसों के छात्रों के प्रवेश सहित विश्वविद्यालय के पूर्व प्रावधान और नियम बरकरार रहेंगे।
एएमयू अपनी अलग प्रवेश परीक्षा भी आयोजित करेगा
विश्वविद्यालय ने बयान में कहा कि एएमयू दाखिला प्रक्रिया के लिए गत वर्षों की भांति अपने स्वयं के काउंसलिंग सत्र आयोजित करेगा। विश्वविद्यालय द्वारा संचालित बीटेक, पीजी पाठ्यक्रमों, कक्षा 11वीं, डिप्लोमा पाठ्यक्रम, संकाय स्कूल और अन्य पाठ्यक्रम आदि सीयूईटी से बाहर है। यानी कि इनके लिए एएमयू अपनी अलग प्रवेश परीक्षा भी आयोजित करेगा।
एकेडमिक काउंसिल द्वारा अनुमोदित समिति की सिफारिशों के अनुसार, एएमयू द्वारा मान्यता प्राप्त मदरसों, संस्थानों के उम्मीदवार भी सीयूईटी स्कोर के आधार पर, यदि वह एएमयू एडमिशन गाइड में निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं और यदि उन्होंने एएमयू ब्रिज कोर्स (सीईपीईसीएएमआई) पास कर लिया है, तो वह प्रवेश लेने के पात्र होंगे।
ये कोटा भी रहेंगे बरकरार
जबकि आंतरिक कोटा और सभी नामांकन कोटा (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग) विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के बच्चे, पूर्व छात्रों के बच्चे, केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चे, जो हाल ही में अलीगढ़ में तैनात, स्थानांतरित हों, दूर के राज्य, केंद्र शासित प्रदेश, शारीरिक रूप से दिव्यांग, एनसीसी कैडेट, उत्कृष्ट खिलाड़ी, उत्कृष्ट डिबेटर, सशस्त्र बलों के बच्चे जो युद्ध में मारे गए बरकरार रहेंगे।