इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कोरोना वायरस महामारी के बीच उत्तर प्रदेश में स्कूल पुन: खोले जाने पर चिंता व्यक्त की है। उच्च न्यायालय ने चिंता जताई है कि छोटे बच्चे सावधानी बरतने में असमर्थ हो सकते हैं, जिससे उनके संक्रमण की गिरफ्त में आने की आशंका और खतरा दोनों बरकरार हैं। हालांकि, इस दौरान उच्च न्यायालय की पीठ ने स्कूल बंद करने का आदेश नहीं दिया।
न्यायालय शुक्रवार को कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार संबंधी मामले में सुनवाई कर रहा था। इस दौरान न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और अजीत कुमार की पीठ ने राज्य सरकार से सभी स्कूलों पर लगातार नजर रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि सभी शिक्षक और छात्र कोविड-19 संबंधी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
पीठ ने कहा कि यह जानकारी प्राप्त हुई है कि राज्य में स्कूल और कॉलेज सात दिसंबर से खोले गए हैं। उच्च न्यायालय ने कहा, यह चिंता का विषय है कि शिक्षक और छात्र कोविड-19 दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे या नहीं। इस बात की हमेशा संभावना रहती है कि छोटे बच्चे दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर सकते हैं। गौरतलब है कि हालिया दिनों में राज्य के कई जिलों में कोरोना संक्रमण के नई मामले तेजी से सामने आए हैं।
जिला प्रशासन को दिशा-निर्देश जारी किए :
इस संबंध में उच्च न्यायालय ने सभी जिलों के जिला प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए। पीठ ने जिला अधिकारियों को कहा कि वे सभी निजी और सरकारी स्कूल का नियमित निरीक्षण करें और जायजा लें कि स्कूलों में कोविड-19 के दिशा-निर्देशों के अनुपालन और मास्क पहनने की अनिवार्यता का अनुसरण हो रहा है या नहीं।