इसका प्रमुख कारण, एक दशक में बाजार व उद्योग मांग के आधार पर वैश्विक स्तर पर पाठ्यक्रम में बदलाव, उद्योग के साथ ट्रेनिंग और इंटर्नशिप कार्यक्रम हैं। आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि तकनीकी शिक्षा में इंजीनियरिंग भारत के कुशल कार्यबल की रीढ़ के रूप में अपनी पकड़ बनाए हुए है।
वैश्विक महामारी कोरोना में भी रिकॉर्ड प्लेसमेंट
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान भी इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी की नौकरियों की मांग बनी रही। शैक्षणिक सत्र 2020-21 में रिकार्ड 5.80 लाख प्लेसमेंट हुए थे। 2024-25 में यह आंकड़ा 6.05 लाख पार कर गया। यह इंजीनियरिंग स्नातकों की निरंतर व मजबूत मांग को दर्शाता है।
कंप्यूटर विज्ञान में 78% प्लेसमेंट
भारत कौशल रिपोर्ट 2025 के अनुसार, बीई और बीटेक में रोजगार क्षमता विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग है। कंप्यूटर विज्ञान इंजीनियरिंग (सीएसई) 78% के साथ शीर्ष पर है। सूचना प्रौद्योगिकी 75%, इलेक्ट्रॉनिक्स व संचार इंजीनियरिंग 72%, इलेक्ट्रिकल में 68%, बॉयोटेक इंजीनियरिंग में 65% तो वहीं मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 60% प्लेसमेंट हुआ है।
कौशल रिपोर्ट 2025 में यूजी में सीएसई प्लेसमेंट 78 फीसदी
रोजगार पर आधारित भारत कौशल रिपोर्ट 2025 के अनुसार, बीई और बीटेक में रोजगार क्षमता विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग है। कंप्यूटर विज्ञान (सीएसई) 78 फीसदी के साथ टॉप पर है। जबकि सूचना प्रौद्योगिकी 75 फीसदी, इलेक्ट्रॉनिक्स व संचार इंजीनियरिंग 72 फीसदी, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 68 फीसदी, बायोटेक इंजीनियरिंग में 65 फीसदी तो मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 60 फीसदी प्लेसमेंट है, जो पारंपरिक मुख्य क्षेत्रों में उद्योग-अकादमिक समन्वय की आवश्यकता को दर्शाता है।