नई दिल्ली। टाइम मैगजीन के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल होने के बाद शाहीन बाग की बिलकिस दादी ने मंगलवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक सम्मान समारोह में दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाये। दादी बिलकिस का आरोप है कि शांतिपूर्ण धरना दे रहे युवाओं को साजिशकर्ता बताकर पुलिस ने यूएपीए जैसा गंभीर एक्ट लगा दिया। जिन बच्चों की अभी पढ़ने-लिखने की उम्र है उन्हें दुर्भावनापूर्वक सलाखों के पीछे भेजा गया है। दादी ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दंगों के मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जाये।
महिलाओं के कई संगठनों ने मिलकर दादी बिलकिस के लिए सम्मान समारोह का कार्यक्रम आयोजित किया था। दादी को भेंट स्वरूप पौधा दिया गया। डॉ. सैयदा हमीद, एनी राजा, भाषा सिंह, डॉ. पूनम बत्रा, वर्तिका मणि, वाणी सुब्रमनियम तथा अन्य महिलाओं ने अपनी संस्था सहेली, पीयूसीएल, एनएफआईडब्ल्यू के जरिये केंद्र सरकार के सामने अपनी मांग रखी है।
महिलाओं का कहना है कि एनआरसी-सीएए का विरोध करने पर ही पुलिस पढ़ने वाले छात्रों को झूठे मुकदमों में फंसा रही है। जबकि इस संघर्ष में शामिल हुए लोग सभी धर्मों, वर्गों और क्षेत्रों से जुड़े हैं। इनमें भारी संख्या में छात्र, शिक्षक, किसानों के समूह संघर्ष में शामिल थे।
इस मौके पर दादी ने कहा कि मोहब्बत का पैगाम देने वाले धरने को कुछ लोगों ने हर तरह से बदनाम किया। महिलाओं पर 500 रुपये लेकर शाहीन बाग धरने में शामिल होने तक का आरोप लगाया। अब जब टाइम मैगजीन ने भी माना है कि शाहीन बाग धरना शांतिपूर्वक किया जा रहा था, इसके बाद भी पुलिस गलत आरोप लगाकर लोगों को गिरफ्तार कर रही है।