अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते बर्चस्व से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। मीडिया कवरेज के लिए गए भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दकी की शुक्रवार को हत्या कर दी गई। दानिश की हत्या की खबर से परिवार के साथ-साथ दिल्ली में उनके साथ काम करने वाले दोस्तों का दिल बैठ गया है। दोस्तों को दानिश के जाने का यकीन नहीं हो रहा।
दानिश के पिता प्रो. अख्तर सिद्दकी ने बताया कि दानिश के जाने से उनका परिवार टूट गया है। दानिश सिद्दकी की जिंदादिली उनके सहकर्मी को रुला रही है। उनकी फोटोग्राफी शानदार थी, इसके लिए उनको पुलित्जर पुरस्कार मिला। लेकिन उनकी जिंदादिली इससे भी कहीं बड़ी थी, इसी लिए उनके चले जाने के बाद दोस्तों को उनकी ये अदा सबसे ज्यादा याद आ रही है।
उन्होंने कई जाने माने समाचार संस्थानों से जुड़कर दिल्ली में सालों काम किया। कोरोना महामारी के दौरान हाल में खींची गई दानिश की तस्वीरें दिल्ली के अस्पतालों और ऑक्सीजन बेड व इलाज के अभाव में दरबदर भटकते लोगों के दर्द बयां करती हैं। दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के संघर्ष को भी फोटोग्राफी में बखूबी देखा जा सकता है।
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दिल्ली में खींची गई उनकी तस्वीरें चर्चा में रहीं
लॉकडाउन के दौरान पैदल जाते प्रवासियों की तस्वीरें, दिल्ली दंगे के दौरान धार्मिक आधार पर दो पक्षों के बीच हुई हिंसा की तस्वीर, जामिया के छात्रों पर एक युवक द्वारा पिस्तैल से फायरिंग करने की तस्वीर, सीमापुरी के श्मशान घाट पर उनके द्वारा लिया गया एरियल शॉट लोगों के बीच खास चर्चा में रहा।
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जामिया के प्रोफोसर ने दानिश को बताया आदर्श छात्र
जामिया मिलिया इस्लामिया पत्रकारिता विभाग की निदेशक प्रो. शोहिनी घोष उनकी हत्या की खबर सुनकर स्तब्ध हैं। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा है कि दानिश अब नहीं रहे। दानिश जामिया मिलिया इस्लामिया में 2005-07 बैच के छात्र थे।
प्रो. घोष बताती हैं कि दानिश बुद्धिमान होने के साथ-साथ बेहद नम्र थे। पढ़ाई के दौरान ही उनकी कैमरे पर अच्छी पकड़ थी। पूरी फैकल्टी और उसकी बैच को पता था कि दानिश कैमरा अच्छा चलाते हैं। प्रो. घोष ने बताया कि 26 अप्रैल को उन्होंने अपने मौजूदा छात्रों के लिए ऑनलाइन सत्र आयोजित किया था। इसमें उन्होंने दानिश को खास तौर पर आमंत्रित किया था।
दानिश ने करीब घंटेभर संजीदगी से छात्रों को कैमरे और फोटोग्राफी से संबंधित बातें सिखाईं। 2018 में उन्होंने दानिश को प्रतिष्ठित पुराछात्र का पुरस्कार दिया था। तब उन्हें पुलित्जर पुरस्कार मिल चुका था। लेकिन उनके हावभाव में कोई परिवर्तन नहीं दिखा। प्रो. घोष ने दानिश को आदर्श छात्र बताया।