अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुपरटेक के चेयरमैन और प्रमोटर आरके अरोड़ा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के मुद्दे पर आदेश सुरक्षित रख लिया। पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार जंगाला ने सोमवार को मामले में ईडी के विशेष लोक अभियोजक नवीन कुमार मत्ता और मनीष जैन की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। अदालत मंगलवार यानी आज अपना फैसला सुनाएगी। इस बीच अधिवक्ता आरके हांडू आरोपी आरके अरोड़ा की ओर से पेश हुए और मामले में डिफ़ॉल्ट जमानत याचिका दायर की।
हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पटियाला हाउस कोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुपरटेक के चेयरमैन के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। अरोड़ा को 27 जून को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की आपराधिक धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था। पिछले हफ्ते दिल्ली उच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी के आधार को चुनौती देने वाली अरोड़ा की याचिका खारिज कर दी थी।
कोर्ट ने कहा, वर्तमान मामले में गिरफ्तारी के आधार याचिकाकर्ता को विधिवत बताए और अधिसूचित किए गए थे और उन्होंने अपने हस्ताक्षर के तहत लिखित रूप में इसका समर्थन किया था। अदालत ने कहा कि अगर इसे विधिवत अधिसूचित किया गया है और गिरफ्तारी के समय सामने लाया गया है और रिमांड आवेदन में विस्तार से बताया गया है तो इसे विधिवत सूचित किया जाना चाहिए और इसकी तामील की जानी चाहिए।
इससे पहले ईडी ने अदालत को अवगत कराया कि आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) दिल्ली पुलिस द्वारा 26 एफआईआर दर्ज की गई थी। हरियाणा पुलिस और यूपी पुलिस ने सुपरटेक लिमिटेड और उसकी समूह कंपनियों के खिलाफ 164 करोड़ रुपये का की धोखाधड़ी के संबंध में धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) के साथ धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात)/420 (धोखाधड़ी)/467/471 आईपीसी के तहत कम से कम 670 घर खरीदारों को धोखा देने का आरोप लगाया है। ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि सुपरटेक लिमिटेड द्वारा एकत्र की गई राशि को संपत्तियों की खरीद के लिए उनके समूह की कंपनियों और बहुत कम मूल्य वाली जमीन वाली कंपनी को भेज दिया गया।