उपहार अग्निकांड मामले में अदालती फाईल से मुख्य दस्तावेजों से छेड़छाड करना गंभीर मामला है। यह न्यायिक सिस्टम पर हमला है। सरकारी वकील ने मुख्य मामले से जुड़े दस्तावेजों से छेड़छाड़ करने के मामले में दोषी ठहराए गए अंसल बंधुओं व अन्य दोषियों की सजा निलंबन मांग पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अदालत के समक्ष उक्त तर्क रखा। इसी के साथ मामले में सरकारी पक्ष ने अपनी जिरह पूरी कर ली।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल अंतिल के समक्ष सरकारी वकील एटी अंसारी ने कहा कि पूरा मामला न्यायिक सिस्टम पर आम लोगों के विश्वास व पिछले 24 वर्ष से इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ रहे उपहार हादसे से पीड़ितों के विश्वास का है। इन लोगों ने 24 वर्ष न्यायिक सिस्टम पर विश्वास किया और सजा के मात्र 15 दिनों बाद सजा निलंबन से उनका विश्वास टूट जाएगा।
उन्होंने कहा निचली अदालत के फैसले से स्पष्ट है कि अंसल व अन्य ने एक षडयंत्र रच कर अदालती स्टाफ दिनेश चंद शर्मा से मिलकर मूल दस्तावेजों से छेड़छाड़ की और दस्तावेज गायब कर दिए। उन्होंने कहा दोषियों ने न्यायिक सिस्टम से खिलवाड़ किया है और उनको उसी सजा मिली है। सजा निलंबन से आम लोगों का विश्वास न्यायिक सिस्टम से कम होगा। उन्होंने कहा अंसल बंधुओं ने पैसे के बल पर सिस्टम से खिलवाड़ किया है और उनको कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए थी। उनकी अपील के निपटारे तक सजा का निलंबन को कोई आधार नहीं है।
उन्होंने कहा सीडीआर, हैंड राईटिंग विशेषज्ञ की रिपोर्ट से सभी आरोप साबित हुए है और विस्तृत जांच के बाद ही दिनेश चंद को नौकरी से बर्खास्त किया गया था। दोषी यह नहीं कह सकते कि वे निर्दोष है और गलत तरीके से फंसाया गया है। अंसल बंधुओं के पिछले रिकार्ड व व्यवहार को देखते हुए उनकी सजा निलंबित न की जाए। इसी के साथ उन्होंने अंसल बंधुओं के अलावा दोषी अनूप सिंह व पीपी बत्रा के मामले में जिरह पूरी कर ली। अब दोषी व उपहार पीड़ित एसोसिएशन इस मामले में उनके तर्को प अपना पक्ष रखेंगे।