उपहार अग्निकांड मामले में अंसल बंधुओं पर आगे भी शिकंजा कसेगा। अभी इन पर दो मामले विचारधीन हैं। इनमें से एक में अंसल बंधुओं पर एक पीड़ित को धमकी देने का आरोप है। जबकि दूसरा पासपोर्ट के साथ हेराफेरी का मामला है। उधर, लंबे अर्से से चल रही कार्रवाई के बीच अंसल बंधुओं की वित्तीय सेहत भी खस्ता हो गई है। रीयल एस्टेट का कारोबार महामारी के दौर में ठप पड़ गया है।
उपहार अग्निकांड मामले में सुशील और गोपाल अंसल के खिलाफ पहले से ही पासपोर्ट मामला लंबित है। इसके तहत अदालत में पासपोर्ट जमा होने के बावजूद इन लोगों ने विदेश यात्राएं की थी। इस मामले की सुनवाई चल रही है। दूसरी तरफ मामले की एक पीड़िता को धमकी देने का भी आरोप अंसल बंधुओं पर है। इस मामले में पुलिस जल्द ही चार्जशीट दाखिल कर सकती है। अगर दोनों मामलों में दोषी सिद्ध होते हैं तो इन पर कानून का शिंकजा और कसेगा। ऐसे में इनको राहत मिलने की उम्मीद न के बराबर है।
दूसरी तरफ अदालत में लंबे समय से विचाराधीन मामलों का असर रियल एस्टेट कारोबार पर भी पड़ा है। महामारी काल में पहले ही रियल एस्टेट कारोबार प्रभावित हुआ है। कानूनी शिकंजा कसने से कारोबारी रिश्तों पर भी असर पड़ेगा। कारोबार में साथ-साथ काम कर रहे दूसरे कारोबारी साथ छोड़ सकते हैं। सजा सख्त होने की सूरत में आर्थिक नुकसान की भरपाई हो पाना संभव नहीं होगी। दोनों भाईयों को दोषी करार देने के बाद सुनाई जाने वाली सजा से इनका भविष्य तय होगा।
जबकि हादसे से पहले अंसल समूह का रीयल एस्टेट कारोबार में दबदबा था। दिल्ली-एनसीआर में इस समूह ने कई प्रोजेक्ट पर काम किया है। वहीं, अभी भी कुछ प्रोजेक्ट चल रहे हैं। उनकी बढ़ती मुश्किलों से उबरने से पहले ही सुनवाई में दोषी करार दिए जाने से परेशानियां कम होती नजर नहीं आ रही हैं।
अदालत ने उपहार अग्निकांड से जुड़े मामले में आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कहा कि आरोपियों को भ्रम था कि अपने गलत मंसूबों के चलते वे सजा से बच जाएंगे, ये अब दुनिया के सामने आ चुका है।
पटियाला हाउस अदालत के मुख्य महानगर दंडाधिकारी पंकज शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि अंसल बंधुओं, दिनेश चंद शर्मा, बत्रा और सिंह पर आपराधिक साजिश, साक्ष्य गायब होने और सरकारी कर्मचारी द्वारा विश्वासघात करने का आरोप संदेह से परे साबित हुआ है।
अदालत ने कहा कि दोषियों ने उन दस्तावेजों को नष्ट कर दिया जिनसे मुख्य केस में उनकी संलिप्तता साबित हो सकती थी। उन्होंने सजा से बचने के लिए साजिश के तहत चुनकर खास दस्तावेज व साक्ष्य नष्ट किए। इस तरह दोषियों ने मुकदमे की सुनवाई में बाधा पहुंचाई और न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ किया।
अदालत ने कहा कि दोषियों ने जिस तरह न्याय प्रक्रिया को अपवित्र किया वह न्यायिक शासन प्रणाली को दूषित करने से कम नहीं था। दस्तावेज और साक्ष्यों से किसी भी तरह लाभ लेने की दोषियों का कृत्य दिखाता है उनके मन में न्यायिक प्रक्रिया के लिए कोई सम्मान नहीं है, जबकि ये हमारे लोकतंत्र का आधार है। दोषियों ने अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी थी।