दिल्ली विश्वविद्यालय में यूजी पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है। ऐसे में आवेदकों के दाखिले व आवेदन प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल हैं। इन सवालों केहल केलिए ऑनलाइन वेबिनार आयोजित किए जा रहे है। बृहस्पतिवार को यूजी पाठ्यक्रमों से जुड़े सवालों के लिए दूसरा वेबिनार आयोजित किया गया। इसमें डीयू कंप्यूटर सेंटर निदेशक डॉ संजीव सिंह समेत दाखिला ब्रांच सदस्यों, हनीत गांधी, अमित पुंडीर, आनंद सोनकर ने विद्यार्थियों के सवालों के जवाब दिए।
विद्यार्थियों ने फॉर्म भरने के लिए जरुरी दस्तावेजों, कैटेगिरी, फॉर्म भरने में सुधार को लेकर काफी सवाल किए। सभी दाखिला एक्सपर्ट की ओर से आवेदकों को एक बार फिर से सलाह दी गई कि वह आवेदन करने से पहले इंर्फोमेशन बुलेटिन को ध्यान से पढ़ें। इस बात का ध्यान रखें कि फॉर्म में नाम, लिंग, जाति, श्रेणी, बैंक विवरण भर देने पर उसमें बदलाव नहीं किया जा सकेगा। आवेदकों को सलाह दी गई कि फॉर्म को जमा कराने से पहले फॉर्म का प्रिव्यू जरुर देखें।
प्रश्न: जाति प्रमाणपत्र किस केनाम का होना चाहिए?
डीयू में दाखिले के लिए जातिप्रमाणपत्र छात्र के नाम का होना चाहिए। पिता केनाम का प्रमाणपत्र स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि अब तक आवेदन नहीं किया है तो आवेदन कर दें और उसकी स्लिप अपलोड कर दें। दाखिले के समय जाति प्रमाण पत्र अनिवार्य है। दस्तावेज कोई भी हो वह आवेदक के नाम केहोने चाहिए।
प्रश्न: क्या तहसीलदार केहस्ताक्षर वाला आर्थिक पिछड़े वर्ग का सर्टिफिकेट स्वीकार होगा?
आर्थिक पिछड़े वर्ग के सर्टिफिकेट पर तहसीलदार के हस्ताक्षर होने पर वह स्वीकार होगा।
प्रश्न: क्या इम्प्रूवमेंट परीक्षा देने वाले आवेदन फॉर्म भर सकते हैं
इम्प्रूवमेंट वाले भी दाखिला पोर्टल पर पंजीकरण आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। अभी आए रिजल्ट में जो अंक प्राप्त हुए हैं उन्हें ही फॉर्म में भरें। यदि पोर्टल पर पंजीकरण नहीं करेंगे तो सिस्टम से बाहर हो जाएंगे और दाखिला नहीं मिल सकेगा।
प्रश्न: मेरिट आधारित और प्रवेश परीक्षा आधारित पाठ्यक्रमों के लिए अलग-अलग आवेदन करना है?
कट ऑफ आधारित और प्रवेश परीक्षा आधारित पाठ्यक्रमों के लिए अलग-अलग आवेदन नहीं करना है। एक ही ऑनलाइन आवेदन फॉर्म से दोनों तरह केपाठ्यक्रमों के लिए आवेदन किया जा सकता है। प्रवेश परीक्षा दो कोर्सेज के लिए आवेदन करने पर पंजीकरण शुल्क 750 रूपये के हिसाब से 1500 रुपये का भुगतान करना होगा।
प्रश्न: डीयू में बी. फॉर्मा के लिए कैसे आवेदन किया जा सकता है?
दिल्ली विश्वविद्यालय में बी.फॉर्मा कोर्स नहीं है, इसलिए इस कोर्स के लिए आवेदन नहीं किया जा सकता है।
कोरोना से बंदी के करीब सवा साल बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में एक बार फिर बड़े पैमाने पर छात्रों की चहलकदमी शुरू होने जा रही है। 16 अगस्त से स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) स्तर के साइंस विद्यार्थियों के लिए कॉलेज व विभाग के दरवाजे खुल जाएंगे। इसके बाद छात्रों की प्रैक्टिकल व प्रोजेक्ट के साथ ऑफलाइन कक्षाएं भी लगने लगेंगी। राजधानी में कोरोना वायरस से जुड़े सभी पैरामीटर के सामान्य होते जाने के क्रम में डीयू प्रशासन ने क्लास चलाने का फैसला लिया है। कक्षाओं में कोरोना वायरस से बचाव के सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा। दूसरी तरफ अन्य पाठ्यक्रमों के लिए ऑनलाइन टीचिंग लर्निंग पहले की भांति चलती रहेंगी।
इससे पहले इसी साल फरवरी में सिर्फ अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को कॉलेज बुलाने की अनुमति दी गई थी। इसे प्रेक्टिकल और लैब से जुड़ी गतिविधियां संभव हो सकी थी। हालांकि, कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच दूसरी लहर आने के बाद अप्रैल में डीयू प्रशासन ने ऑफलाइन कक्षाओं को स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद से कक्षाएं ऑनलाइन ही चल रही थी। अब एक बार फिर से डीयू ऑफ लाइन मोड में जा रहा है। बीते साल मार्च में बंद होने के बाद से पहली बार यूपी व पीजी स्तर के विज्ञान के सभी विद्यार्थी कॉलेज में पढ़ाई कर सकेंगे।
डीयू रजिस्ट्ररार डॉ विकास गुप्ता ने कहा कि साइंस पाठ्यक्रमों में प्रैक्टिकल का इनपुट है इसकेलिए जरुरी है कि विद्यार्थियों को कॉलेज आने की अनुमति दी जाए। साइंस पाठ्यक्रमों में विद्यार्थी कम होते हैं लिहाजा कॉलेजों व विभाग में सामाजिक दूरी का पालन हो जाएगा। इन विद्यार्थियों को प्रयोगशाला व पुस्तकालय में आने की अनुमति होगी। कॉलेजों के प्रिंसिपल व हॉस्टल के प्रोवोस्ट डीन छात्र कल्याण व प्रॉक्टर के परामर्श से बाहरी राज्यों के छात्रों के लिए हॉस्टल उपलब्ध कराते समय सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करेंगे। विभागों व कॉलेजों को कोविड-19 प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना होगा।
दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए बृहस्पतिवार तक एक लाख दस हजार से ज्यादा छात्रों ने पंजीकरण करवाया लिया। डीयू का दाखिला पोर्टल दो अगस्त को शुरू किया गया था। ये पंजीकरण डीयू में स्नातक पाठ्यक्रमों की 70 हजार सीटों के लिए करवाया गया है। दाखिला आवेदन प्रक्रिया 31 अगस्त तक चलेगी।
जानकारी के अनुसार बृहस्पतिवार शाम सात बजे तक 110494 छात्रों ने स्नातक पाठ्यक्रमों और 87912 छात्रों ने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए करवाया। इसके साथ ही 12539 छात्रों ने एमफिल एवं पीएचडी पाठ्यक्रमों के लिए पंजीकरण करवाया।
वहीं दूसरी ओर डीयू ने बृहस्पतिवार को पहला वर्चुअल ओपन डे आयोजित किया। इस दौरान अधिकारियों ने छात्रों के सवालों के जवाब दिए। इसके साथ छात्रों को फार्म भरते समय सावधानी बरतने की सलाह दी क्योंकि उनके पास इसमें बाद में सुधार करने का मौका नहीं होगा।
डीयू कंप्यूटर सेंटर के निदेशक संजीव सिंह ने कहा कि फार्म भरते समय केटेगरी चुनने में सावधानी बरतें। ये फार्म एक बार में भरना जरूरी नहीं है। फार्म भरने के लिए काफी समय है। फार्म में प्रवेश परीक्षा के लिए अलग टैब भी है। इसके अलावा छात्र अपने लिए उपयुक्त कोर्स भी यहां चुन सकते हैं। उन्होंने कहा कि ईसीए एवं खेल श्रेणी में आवेदन करते समय छात्रों को सतर्क रहने की जरूरत है। इसके अलावा अधिकारियों को डीयू से मान्यता प्राप्त अन्य शिक्षा बोर्डों के बारे में छात्रों के सवाल मिले।
दिल्ली विश्वविद्यालयय अब लद्दाख विश्वविद्यालय का शोध व अकादमिक कार्यों में सहयोग करेगा। दोनों विश्वविद्यालय केबीच बृहस्पतिवार को पांच वर्ष के लिए करार हुआ है। इस करार केतहत मेटा यूनिवर्सिटी प्रोग्राम के तहत संयुक्त पीजी कोर्स, पीएचडी प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे। वहीं दोनों संस्थान शोध कार्यों को बढ़ावा देंगे। बृहस्पतिवार को डीयू स्थित वायर रीगल हॉल में दोनों विवि केबीच करार हुआ। इस अवसर पर डीयू कार्यवाहक कुलपति प्रो पीसी जोशी, लददख विवि के कुलपति सी फुनसोग व डीयू रजिस्ट्रार डॉ विकास गुप्ता व लद्दाख विवि के रजिस्ट्ररार डॉ इम्तियाज समेत दोनों विश्वविद्यालयों के पदाधिकारी उपस्थित थे।
इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो पीसी जोशी ने इस करार को दोनों विश्वविद्यालयों केलिए एक ऐतिहासिक पल बताया। उन्होंने कहा कि इस करार के होने से डीयू लद्दाख विश्वविद्यालय का अकादमिक और शोध कार्यों में सहयोग करेगा। इस करार से दोनों संस्थान मित्रता केसूत्र में बंध गए हैं। भारत सरकार देश के सुदूर हिस्सों में उच्च शिक्षा को पहुंचाना चाहती है। ऐसे में डीयू इसी को आगे बढ़ाने में सरकार का सहयोग करना चाहता है। इस करार के माध्यम से डीयू लद्दाख विश्वविद्यालय से संसाधन, प्रयोगशाला से लेकर अनय गतिविधियों को साझा करेगा। दोनों संस्थान एक साथ मिल कर शोध करें इसका भी प्रयास किया जाएगा।
दरअसल लद्दाख विश्वविद्यालय ट्रांस हिमालयन रीजन में स्थित है, इस कारण से वहां शोध की संभावनाएं हैं। मेसिव ओपन ऑनलाइन लर्निग कोर्र्स(मूक) और आईटीसी को लेकर भी संयुक्त रुप से वर्कशॉप आयोजित किए जाएंगे। स्पोट्र्स और सांस्क़ृतिक एक्सचेंज प्रोग्राम भी होंगे