दिल्ली दंगों के लिए एक बड़ा षड्यंत्र रचा गया था और हिंसा भड़काने, सीसीटीवी कैमरों को हटाने और सबूत मिटाने में आरोपियों ने अहम भूमिका निभाई। दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद सहित अन्य आरोपियों की जमानत याचिका पर आपत्ति जताते हुए अदालत के समक्ष उक्त तर्क रखा।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष विशेष अभियोजन अधिकारी अमित प्रसाद ने कहा कि डीपीएसजी ग्रुप के संदेशों से स्पष्ट है कि वे %हिंसा% की बात करते हैं। उन्होंने कहा विरोध स्थलों को स्थानीय लोगों की भागीदारी के बिना अंतिम रूप दिया गया।
अधिवक्ता प्रसाद ने उमर खालिद, शरजील इमाम, खालिद सैफी, सलीम मलिक, शहाब अहमद और सलीम खान व अन्य की जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा मजिस्ट्रेट के सामने गवाह जॉनी द्वारा दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा गवाह ने दंगो को देखा और आरोपियों के बारे में विस्तृत बयान दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि 16 और 17 फरवरी की बैठक किसी भी तरह से विरोध प्रदर्शन से जुड़ी नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक में तेजाब जमा करने को लेकर चर्चा हुई, जो दर्शाता है कि उनका उद्देश्य हिंसा पैदा करना था।
उन्होंने 16 और 17 फरवरी के डीपीएसजी समूह पर एक सदस्य सुल्तान खान द्वारा प्रसारित कुछ संदेशों का उल्लेख करते हुए कहा हिंसा भड़काने के लिए काम किया गया। स्थानीय लोगों के पास सबूत हैं जो अभियोजन पक्ष के मामले के समर्थन में आए हैं।
उन्होंने कहा स्थानीय लोगों के समर्थन के बिना असंगठित रूप से विरोध प्रदर्शन किए गए। उन्होंने कहा दिल्ली भर में फैले 23 विरोध स्थलों में से इस विशिष्ट क्षेत्र में दंगे हुए। स्थानीय लोगों की संलिप्तता से इनकार करते हुए उन्होंने कहा एक समान पैटर्न है।
उन्होंने इसे %चुप्पी की साजिश% बताते हुए बताया कि 18 से 21 तारीख के बीच कुल 34 संदेश हैं। फिर भी, जैसे ही हिंसा शुरू हुई, समूह में पूर्ण सन्नाटा छा गया बातचीत को संदेश साझा करने और आगे भेजने तक सीमित कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध शांतिपूर्ण नहीं था, क्योंकि इसमें लाठी, दंडे और लाल मिर्च का प्रयोग किया गया।
उन्होंने उमर खालिद की दंगो में भूमिका बताते हुए कहा कि चैट में स्पष्ट है कि खालिद ने कहा खून बनाना पडेगा, ऐसा नहीं चलेगा। बयान का जिक्र करते हुए एसपीपी प्रसाद ने बयानबाजी पर पूछा कि अगर खालिद अपना खून नहीं बहा रहे हैं तो किसके खून की बात कर रहे हैं?