दिल्ली के पुराने सचिवालय की असेंबली हॉल के नीचे यह हॉल स्थित है। माना जा रहा है कि इसका निर्माण 1912 में अंग्रेजों ने अपनी राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने के बाद बनवाया था।
भारतीय पुरातत्व से जुड़े इतिहासकारों और विरासत विशेषज्ञों ने दिल्ली विधानसभा की इमारत के नीचे मिली सुरंग की वैज्ञानिक जांच करने का आह्वान किया है। इन विशेषज्ञों ने 2016 में पहले ही इस तरह की मिस्ट्री टनल का अनुमान लगाया था।
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विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक पुरातात्विक दृष्टिकोण से इस सुरंग की जांच नहीं की जाती और इसको लेकर कोई पुख्ता दस्तावेजी सबूत नहीं मिल जाता, तब तक कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। दिल्ली के पुराने सचिवालय की असेंबली हॉल के नीचे यह हॉल स्थित है। माना जा रहा है कि इसका निर्माण 1912 में अंग्रेजों ने अपनी राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने के बाद बनवाया था।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने शुक्रवार को बताया कि अभी सुरंग का ऐतिहासिक महत्व का पता नहीं चला है। अभी अनुमान है कि यह सुरंग विधानसभा भवन को लाल किले से जोड़ती है। उन्होंने यह अनुमान लगाया था कि अंग्रेज इस सुरंग से भारतीय क्रांतिकारियों को यहां लाया करते थे। जबकि इतिहासकारों और विरासत विशेषज्ञों ने दिल्ली के इतिहास पर व्यापक शोध किया है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के दावों पर संदेह जताया है और साइट की वैज्ञानिक जांच का सुझाव दिया है।