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दिल्ली विधानसभा में मिली सुरंग: फांसी घर को बनाया जाएगा स्वतंत्रता सेनानियों का मंदिर, अगले साल तक पर्यटक भी देख सकेंगे

Fri, 03 Sep 2021 09:54 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने कहा कि साल 1993 में जब वह विधायक बने तो यहां एक सुरंग के बारे में अफवाह उड़ी थी। उन्होंने इसका इतिहास को खोजने की कोशिश की, हालांकि इसके विषय में पर्याप्त जानकारी नहीं मिल सकी।
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दिल्ली विधानसभा में मिली सुरंग - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिल्ली विधानसभा के एक कमरे के अंदर से लाल किले को जोड़ने वाली एक सुरंग का पता चला है। स्वतंत्रता सेनानियों को लाल किले से यहां लाने के लिए इस सुरंग का इस्तेमाल किया जाता था। इतिहास में प्रमाण मिलते हैं कि वर्तमान दिल्ली विधानसभा की इमारत को स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम दिनों के वर्षों में अंग्रेजों ने अदालत के रूप मे इस्तेमाल किया। इसका समय 1926-27 से लेकर 1947 तक आजादी से पहले तक का माना जा रहा है।

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विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने कहा कि साल 1993 में जब वह विधायक बने तो यहां एक सुरंग के बारे में अफवाह उड़ी थी। उन्होंने इसका इतिहास को खोजने की कोशिश की, हालांकि इसके विषय में पर्याप्त जानकारी नहीं मिल सकी। गोयल ने कहा कि अब यह सुरंग मिल गई है। उसे आगे नहीं खोद रहे हैं, क्योंकि मेट्रो परियोजना और सीवर स्थापना के कारण सुरंग के सभी रास्ते नष्ट हो गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि अंग्रेजों ने इस सुरंग का इस्तेमाल स्वतंत्रता सेनानियों को अदालत में लाने के लिए किया था। दिल्ली विधानसभा और लाल किला की दूरी करीब 5.6 किलोमीटर है।

कैसे मिली सुरंग
दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने बताया कि 1993 में जब वह विधायक बने तो यहां के एक कर्मचारी से सुना था कि भवन में ही अंग्रेजों की कोर्ट चलती थी। यहां से एक सुरंग के जरिए स्वतंत्रता सेनानियों को लाल किले ले जाया जाता था। कुछ और जगहों से भी सुरंग के बारे मे सुना था तो इसकी खोज करने के लिए कहा गया, जिसके बाद विधानसभा सदन में सुरंग मिल गई।
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फांसी घर में बनेगा स्वतंत्रता सेनानियों का मंदिर
अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा परिसर में फांसी के कमरे की मौजूदगी के बारे में पता था, लेकिन इसे कभी खोला नहीं गया था। आजादी के 75वां साल के अवसर पर उन्होंने इस कमरे का निरीक्षण करने का फैसला किया था। अब इस कमरे को स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक श्रद्धांजलि के रूप में तीर्थस्थल में बदला जाएगा। अगले साल तक पर्यटक भी इसे देखने आ सकेंगे।

दिल्ली विधानसभा इमारत का इतिहास
विधानसभा की इमारत के बारे में प्रमाण मिलते हैं कि दिल्ली के देश की राजधानी बनने के बाद 1911 से इस इमारत को सेंट्रल लेजेस्लेटिव एसेंबली यानी अंग्रेजों ने इस इमारत को अपने संसद भवन के रूप में उपयोग किया। यह इमारत 1926 तक अंग्रेजों की संसद रही। 14 साल तक यह इमारत अंग्रेजों की संसद रही और 1926 से 1947 तक अंग्रेजों की अदालत।

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