एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया के उस बयान पर व्यापारियों ने नाराजगी जाहिर की है, जिसमें गुलेरिया ने कहा है कि बाजारों में भीड़, सामाजिक दूरी का नियम नहीं मानने और मास्क पहनने में लापरवाही बरतने वालों की वजह से कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है।
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व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड (सीटीआई) ने आपत्ति जताई है। कहा है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को इस तरह की टिप्पणियों से ही पैनिक फैलता है। बाजार में भीड़ के लिए जिम्मेदार व्यापारी नहीं हैं। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा है कि यह कहना कि बाजारों में उमड़ने वाली भीड़ ही कोरोना संक्रमण का मुख्य कारण है तो यह गलत आशंका है।
एक दो बाजारों की तस्वीरें वायरल होने से पूरे व्यापारिक जगत को निशाना बनाना ठीक नहीं। गुलेरिया राजनीतिक रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ पर तो कोई बयान नहीं देते। दिल्ली में करीब 950 छोटे-बड़े बाजार हैं, जिनमें 50 बाजारों में भी भीड़ नहीं दिखाई देगी। कोविड की वजह से अभी व्यापार ना के बराबर है। लोगों के पास पैसों की कमी है। कारोबारियों की हालात खराब है।
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गोयल ने कहा कि बाजार और व्यापारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। बाजार में भीड़ के लिए जिम्मेदार व्यापारी नहीं हैं। व्यापारी अपनी दुकान, दफ्तर और गोदाम के भीतर कोविड गाइडलाइन्स को सुनिश्चित कर सकता है। बाजारों में बाहर सड़क पर और सार्वजनिक जगहों में पुलिस और प्रशासन को मेहनत करनी होगी। जिस किसी बाजार में भीड़ दिखती है, तो प्रशासन को संबंधित मार्केट एसोसिएशन्स के साथ मीटिंग कर हालात सुधारने पर काम करना चाहिए।
बैक्विट हॉल एसोसिएशन के पदाधिकारी संजीव नागपाल ने बताया कि अभी बहुत सारे सेक्टर है जो बंद है। बैंक्वेट हॉल, सिनेमा, जिम, ऑडिटोरियम, बैंड, टूर एंड ट्रैवल जैसे काम बंद हैं। शादी का मौसम भी नहीं है कि बाजारों में रौनक बढ़ेगी। खरीदार फिलहाल बाजार से दूर है। शादी-ब्याह लगभग बंद है, कोई बड़ा फेस्टिवल भी नजदीक नहीं है। ऐसे में व्यापार पर दोष मढ़ना ठीक नहीं। बाजारों को ही हमेशा सॉफ्ट टारगेट बनाया जाता है।