अदालत ने घाटी में टेरर फंडिंग से जुड़े एक मामले में शुक्रवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के पूर्व पुलिस अधीक्षक अरविंद दिग्विजय नेगी, कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज और अन्य को एक महीने की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
विशेष न्यायाधीश परवीन सिंह ने आरोपियों को 24 मार्च तक के लिए जेल भेजा है। इससे पहले एनआईए ने आरोपियों को हिरासत में पूछताछ की अवधि समाप्त होने पर अदालत के सामने पेश किया। एजेंसी ने प्रतिबंधित आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के एक भूमिगत कार्यकर्ता को गुप्त दस्तावेज लीक करने के आरोप में नेगी को गिरफ्तार किया था।
यह मामला भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं और कड़े गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज किया गया था, जिसमें आतंकवाद और आतंकी फंडिंग से संबंधित मामले भी शामिल हैं। एनआईए ने आरोप लगाया है कि आरोपी लश्कर-ए-तैयबा के जमीनी कार्यकर्ताओं और पूरे भारत में भर्ती किए गए लोगों का नेटवर्क चला रहे हैं।
एजेंसी ने कहा कि साजिश के तहत आरोपी अपने विदेशी स्थित आकाओं के संपर्क में थे। उनके निर्देश पर महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, सुरक्षा बलों के साथ-साथ आतंकवादी हमलों को शुरू करने के लिए लक्षित स्थानों की पहचान करने में लगे थे।