कमीशन पर जालसाजों को मुहैया करवाते थे बैंक खाता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। डिजिटल अरेस्ट कर लोगों से ठगी करने वाले जालसाजों के तीन मददगार को पश्चिम जिला पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों को जिला साइबर सेल ने गुजरात और झारखंड से गिरफ्तार किया है। आरोपी कमिशन पर जालसाजों को अपना बैंक खाता मुहैया करवाते थे, जिसमें ठगी की रकम डाली जाती थी।
बाद में आरोपी अपना कमीशन लेकर जालसाजों को पैसा ट्रांसफर कर देते थे। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर ठगी के गैंग का पर्दाफाश करने में जुटी है। पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त दरादे शरद भास्कर ने बताया कि 19 जुलाई को पेशे से नर्सिंग अधिकारी देबजानी दास चौधरी ने पश्चिम जिला साइबर सेल में ठगी की शिकायत की। उन्होंने बताया कि जालसाजों ने व्हाट्सएप कॉल किया। खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर उनका नाम नरेश गोयल मनी लॉन्ड्रिंग में आने की बात कही। जांच के बहाने आरोपियों ने उन्हें व्हाट्सएप पर वीडियो निगरानी में रखा और उनके बैंक खाते की जानकारी लेकर धोखे से उनके खाते से सात लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लिए। पीड़ित के बयान पर पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया।
निरीक्षक विकास बुलडक के नेतृत्व में पुलिस टीम ने उन बैंक खातों की जांच की, जिसमें रकम डाली गई थी। जांच में पता चला कि ठगी की राशि का 30 फीसदी झारखंड स्थित मुथूट गोल्ड लोन खाते में और 70 फीसदी गुजरात के सुरेंद्रनगर स्थित भारतीय स्टेट बैंक के खाते में ट्रांसफर किया गया है। पुलिस ने इन बैंक शाखा के सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसमें पता चला कि आरोपी ने चेक के जरिए खाते से पैसे निकाले हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने झारखंड और गुजरात में छापे मारे। पुलिस ने झारखंड से जितेंद्र कुमार और गुजरात से शोएब भाई मुल्तानी और असलम भाई मुल्तानी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि आरोपी जालसाजों के लिए कमीशन पर म्यूल खाते खोलने, धन निकालने और धन हस्तांतरित करने में शामिल हैं। आरोपियों ने बताया कि ठगी के एक मामले में उन्हें रकम की दो से चार फीसदी कमीशन के तौर पर दिया जाता था। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि शोएब मुल्तानी गुजरात मेंं एक ट्रैक्टर कंपनी में सेल्समैन का काम करता था, वहीं असलम भाई मुल्तानी गुजरात में एक डेयरी फार्म चलाता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल और पांच सिम कार्ड बरामद किए हैं।