दिल्ली विश्वविद्यालय में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लाए जा रहे चार वर्षीय अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम( एफवाईयूपी) के ढांचे को डीयू की एकेडमिक काउंसिल(एसी) से मंजूरी मिल गई है। इसके तहत अब कभी भी पढ़ाई छोड़कर कभी भी से वापस आकर उसे पूरा कर सकेंगे। इस तरह से उन्हें मल्टीपल एंट्री और मल्टीपल एक्जिट का विकल्प मिलेगा। तीन साल की स्नातक पढ़ाई पूरी करने पर दो साल का स्नातकोत्तर की पढ़ाई करनी होगी। जबकि चार साल का कोर्स पूरा करने पर एक साल की ही स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करनी होगी।
अब आगामी 30 अगस्त को होने वाली कार्यकारी परिषद की बैठक में एफवाईयूपी ढांचे को पास करवाने केलिए रखा जाएगा। यहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे सत्र 2022-23 से लागू किया जा सकता है। पाठ्यक्रम केनाम बैचलर ऑफ आट्र्स(ऑनर्स), बैचलर ऑफ साइंस (ऑनर्स), और बैचलर ऑफ कॉमर्स (ऑनर्स) हो जाएंगे।
मल्टीपल एंट्री व एग्जिट का प्रावधान
एकेडमिक काउंसिल सदस्य डॉ सुंधाशु कुमार ने कहा कि एफवाईयूपी के कोर्स को मंजूरी मिलने के साथ अब चार वर्षीय प्रोग्राम में मल्टीपल एंट्री व एग्जिट का प्रावधान किया गया है। इस तरह से विद्यार्थी कभी भी अपने कोर्स को छोड़कर कभी भी वापसी कर अपने कोर्स को पूरा कर सकेगा। एक साल का कोर्स पूरा करने पर सर्टिफिकेट, दो साल केलिए डिप्लोमा, तीन साल के लिए डिग्री व चार साल का कोर्स पूरा करने डिग्री विद रिसर्च मिलेगी। तीन साल की पढ़ाई करने पर उसे दो साल का स्नातकोत्तर की पढ़ाई करनी होगी जबकि चार साल का कोर्स पूरा करने पर विद्यार्थी को एक साल की स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करनी होगी। सुधांशु कुमार ने बताया कि स्नातक करने के बाद एक साल का एमए करने पर 12 पेपर पढने होंगे जबकि अब तक एमए में 16 पेपर होते थे।
एक साल से दूसरे साल में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा नहीं
डीयू का कोई छात्र पढ़ाई छोड़कर एक साल से दूसरे साल में दाखिला लेने के लिए आता है तो उसे प्रवेश परीक्षा नहीं देनी है। जबकि किसी अन्य विवि के छात्र को दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा देनी होगी।
भारतीय भाषाओं के पेपर कम किए गए
चार वर्षीय प्रोग्राम के तहत भारतीय भाषाओं के पेपर कम किए गए हैं। एकेडमिक काउंसिल सदस्य डॉ आलोक रंजन पांडेय व डॉ सुधांशु कुमार ने कहा कि चार साल कोर्स का जो प्रारुप है उसके कई स्वरुप से हम सहमत नहीं हैं। इस कोर्स के प्रारूप में न केवल भारतीय भाषाओं, बल्कि वाणिज्य विषय का वर्क लोड कम हो रहा है। पहले हिंदी दो सेमेस्टर में अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाती थी, उसे अब अंग्रेजी/भारतीय भाषा कर दिया गया है। इस प्रारूप में आठ जेनेरिक इलेक्ट्रिक पेपर हैं और 12 कोर पेपर हैं। यह सही नहीं है। अब अंग्रेजी और भारतीय भाषा के पेपर कर दिए गए हैं। छात्र अंग्रेजी को प्राथमिकता देंगे और भारतीय भाषा नहीं लेंगे। इससे भारतीय भाषाएं मरेंगी। सदस्यों का कहना है कि इस चार वर्षीय कोर्स के प्रारूप को बनाने में कॉलेज केशिक्षकों, कॉलेज के स्टॉफ काउंसिल के साथ-साथ विभागों की काउंसिल से राय नहीं ली गई है। लिहाजा इस प्रारुप को सुचारू रुप देने केलिए सदस्यों के पास भेजा जाए।
नए कॉलेजों के लिए नाम कुलपति तय करेंगे
दिल्ली विश्वविद्यालय जल्द ही दो नए कॉलेज खोलने की तैयारी कर रहा है। एसी में इन कॉलेजों के नामों पर मुहर लगनी थी लेकिन इसका जिम्मा एसी ने कुलपति पर छोड़ दिया है। कॉलेजों के लिए वीर सावरकर, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, सावित्री बाई फुले, अटल बिहारी वाजपेयी, सरदार पटेल, स्वामी विवेकानंद, चौधरी ब्रहमप्रकाश के नाम सुझाए गए थे।
एलएलबी और एलएलएम के छात्रों को ऑनलाइन केस सामग्री निशुल्क मिलेगी
डीयू में एलएलबी और एलएलएम के विद्यार्थियों को ऑनलाइन केस सामग्री निशुल्क मिलेगी। एसी की बैठक में इसे मंजूरी मिल गई है। ऑनलाइन केस सामग्री के लिए एलएलबी के छात्र 1000 रूपये और एलएलएम के छात्रों से 1250 रुपये प्रति सेमेस्टर फीस ली जा रही थी।