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संकट के सिपाही: अपने से दूर रहे, संक्रमित हुए फिर भी फर्ज से नहीं डिगे

Tue, 04 May 2021 07:20 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इस संकट के समय अपना फर्ज निभाने वाले कोरोना योद्धा विषण परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। जब हर कोई अपने घर में सुरक्षित रहने का प्रयास कर रहा है तो ये सब अपना दर्द भूलकर दूसरों की सेवा में लगे हुए हैं। 
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संकट के सिपाही - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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इस संकट के समय अपना फर्ज निभाने वाले कोरोना योद्धा विषण परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। जब हर कोई अपने घर में सुरक्षित रहने का प्रयास कर रहा है तो ये सब अपना दर्द भूलकर दूसरों की सेवा में लगे हुए हैं। वे जरुरत होने पर भी अवकाश नहीं लेते क्योंकि उन्हें पता है कि संक्रमितों की जान बचाने के लिए हर एक मिनट कीमती है। 

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टीकाकरण के लिए 24 घंटे काम
पिछले एक साल से लगातार दिन-रात एक कर शशिबिंद लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए कार्य कर रहे हैं। इस दौरान वह परिवार से दूर रहे। संक्रमित हुए। फिर भी अपना काम बखूबी निभा रहेष शशिबिंदा स्वास्थ्य विभाग की सहयोगी संस्था यूएनडीपी में जिला वैक्सीन कोल्ड चेन मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। वह स्वास्थ्य विभाग के साथ वर्ष 2014 से कार्य कर रहे हैं। ई-विन पोर्टल के आधार पर ही टीकाकरण को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए कोविन पोर्टल तैयार किया गया। ई-विन पोर्टल के माध्यम से नियमित ऑन लाइन मैनेजमेंट और कोल्ड चेन रखरखाव के लिए शशिविंदा को टेक्निकल सपोर्ट देने की जिम्मेदारी भी दी गई, जिसे वह 24 घंटे लगातार काम करके निभा रहे हैं। 

उन्होंने बताया कि जब स्थिति ज्यादा भयावह हुई और मुश्किलें बढ़ी तब उन्होंने अपने को असुरक्षित समझकर परिवार को सुरक्षित रखने के लिए पत्नी और बच्चों को पैतृक गांव में भेज दिया। उसी दौरान वह संक्रमित भी हो गए, लेकिन वह कोरोना से डटकर लड़ते रहे। बिना किसी घबराहट के साथ खुद को संभाला और कोरोना की जंग जीतकर दोबारा अपने कार्यों को उसी लगन के साथ शुरू कर दिया। वर्तमान में वह अपनी पत्नी व दो बच्चों के साथ शाहजहांपुर में रह रहे हैं। 
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सैनिटाइज कर मानवता का संदेश दे रहा मंडी का दंपती
कोरोना संक्रमण के बीच उरला गांव का चंदेल दंपती संकट के सिपाही बन गए हैं। कुंती चंदेल और उनके पति उरला कस्बे को सैनिटाइज करने का अभियान छेड़ा है। पंचायत में कोरोना संक्रमण मामलों में बढ़ोतरी हुई है। यहां सहकारी सभा के सेल्समैन और उरला स्कूल की अधीक्षक सहित कई लोग संक्रमण की चपेट में आए हैं। प्रशासन ने पंचायत तो तीन वार्डों उरला, हियुण और नौशा को कंटेनमेंट जोन बनाया है। दस दिन से यहां सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद चल रहे हैं। उरला की कुंती चंदेल अध्यापिका हैं और पति मुरारी लाल जल शक्ति विभाग में कनिष्ठ अभियंता के पद पर तैनात हैं। दोनों सुबह-शाम उरला कस्बे को सैनिटाइज कर रहे हैं। स्थानीय बाजार, स्कूल परिसर, आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र, वन परिक्षेत्र कार्यालय, बैंक और सहकारी समिति, वर्षा आश्रालय सहित सभी सार्वजनिक स्थानों में सैनिटाइजेशन कार्य किया है। दोनों लोगों को कोरोना नियमों का कड़ाई से पालन करने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। गत वर्ष भी कोरोना संक्रमण के दौरान लॉकडाउन में इस दंपती ने कस्बे को सैनिटाइज करने का अभियान चलाया था। इस बार भी अभियान शुरू किया है। 

मरीजों को परिवार माना तो दूर हो गया संक्रमण का डर
संक्रमण का खतरा जरूर है, लेकिन जब कोई संक्रमित ठीक होकर लौटता है तो हमें सुकून मिलत है। अभी तक बारह मरीजों को पूरी तरह से ठीक कर घर भेजना और बेहतर सेवा के लिए प्रेरित करता है। यह कहना है नाजिया कौसर का। 

नाजिया पुंछ के राजा सुखदेव सिंह कोविड वार्ड में बतौर फीमेल मल्टीपपर्ज हेल्थ वर्कर पद पर नर्स की सेवाएं दे रही हैं। नाजिया का कहना है कि शुरू में उन्हें भी डर लगा लेकिन कोविड वार्ड में आने वाले मरीजों को अपने परिवार के सदस्य के रूप में देखने पर सारा डर दूर हो गया। नाजिया कहती हैं कि एक साल से कोविड वार्ड का अनुभव सुकून देता है। जानलेवा महामारी से संक्रमित लोग जब ठीक होकर घर लौटते हैं तो यह पल देखकर उन्हें बहुत अच्छा लगता है। 

नाजिया ने कहा कि संकट की इस घड़ी में कोरोना से डरने के बजाय उससे बचाव के  उपायों को प्राथमिकता देना चाहिए। लंबे समय से कोविड वार्ड में ड्यूटी देने के बावजूद यदि वे खुद संक्रमित नहीं हुई हैं तो यह केवल रोकथाम के उपायों को गंभीरता से लेने से ही मुमकिन हो पाया है। 

कोरोना से लड़े, फिर भी सेवा में डटे रहे डॉ. लईक
शाहजहांपुर की जैतीपुर सीएचसी में तैनात डॉ. लईक अहमद अंसारी पिछले साल से लेकर अब तक कोविड-19 के खिलाफ जंग में अपना पूरा योगदान दे रहे हैं। गत वर्ष कोरोना मरीजों की सेवा करते-करते डॉ. लईक खुद संक्रमित हो गए थे। डॉ. लईक बताते हैं कि जब उन्हें संक्रमित होने की जानकारी हुई तब वह ड्यूटी पर थे। परिवार बरेली में था। पहले मन घबराया लेकिन फिर खुद को और परिवार को हिम्मत बंधाई और मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में भर्ती होकर इलाज कराया। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और 14 दिन बाद कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आते ही सेवा में लौट आए। क्षेत्र में शत प्रतिशत टीकाकरण कराया। संक्रमित मरीजों के बीच पहुंचकर उन्हें दवाई दी और हौसला बढ़ाया। इसके लिए मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, विधायक वीर विक्रम सिंह प्रिंस आदि ने कोरोना योद्धा के रूप में सम्मानित भी किया। 

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