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Delhi News: धरती कांपने के बाद सिहर उठी राजधानी, बाहर निकले खौफजदा लोग

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दोपहर में भूकंप के झटके लगे, 15 से 20 मिनट तक घरों व दफ्तरों में घुसने की हिम्मत नहीं जुटा सके लोग
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दोपहर के करीब 2:51 बजे थे, एकाएक लोगों को लगा मानो पूरी धरती कांपने लगी है। एकदम तो लोगों को समझ नहीं आया कि यह क्या हो रहा है, लेकिन जैसे ही उन्होंने महसूस किया कि राजधानी में भूकंप के तेज झटके आए हैं, वह चिल्लाते हुए घरों व दफ्तरों से बाहर भागे। सभी की जुबान पर भूकंप आया, भूंकप आया था।
चंद ही मिनटों बाद गली मोहल्लों और मुख्य सड़कों पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई। अचानक फोन की घंटियां भी बजने लगीं। सभी एक-दूसरे की खैरियत पूछने लगे। सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म पर भी भूकंप के मैसेज घूमने लगे। लोग एक-दूसरे से भूकंप की तीव्रता के बारे में बात करते नजर आए। हर किसी की जुबान पर बस यही था कि भूकंप के झटके काफी तेज थे। लोग बस यह दुआ कर रहे थे कि कोई बड़ा नुकसान न हो जाए। समय बीता तो भूकंप की तीव्रता और उसके प्रभाव की खबरें आने लगीं। लोगों को जब यह पता चला कि भूकंप ने कोई नुकसान नहीं किया है तो राहत की सांस ली। हालांकि 15 से 20 मिनट तक लोग घरों और दफ्तरों में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।
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पांडव नगर में लोगों ने बताया कि भूकंप आने के बाद सभी लोग घरों से बाहर आकर सड़कों की तरफ चले गए। करीब एक मिनट तक भूकंप के झटके लगते रहे। इस दौरान ऐसा लगा कि पूरा घर गिर जाएगा। नेपाल में कुछ ही समय के अंतराल पर एक के बाद एक आए चार भूकंप के कारण दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए।
वहीं एम्स में समारोह के दौरान एक डॉक्टर ने बताया कि इस समय सर्जरी कर रहे थे। अचानक ऐसा लगा कि भूकंप आ गया। इस दौरान कुछ देर के लिए सर्जरी प्रभावी हो गई। जब सब कुछ सामान्य हुआ तो फिर से सर्जरी शुरू कर दी।


पुलिस ने लोगों से की न घबराने की अपील

भूकंप के बाद दिल्ली पुलिस ने ट्विटर पर एक पोस्ट में कहा कि हमें उम्मीद है कि आप सब सुरक्षित हैं। कृपया अपनी इमारतों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर आ जाएं, लेकिन घबराएं नहीं। लिफ्ट का इस्तेमाल न करें। किसी भी आपातकालीन मदद के लिए 112 पर फोन करें।


जोन 4 में है दिल्ली
भूकंपीय क्षेत्र के हिसाब से दिल्ली भूकंपीय मानचित्र के जोन-IV में आती है। दिल्ली भूकंप के लिए संवेदनशील मानी जाती है। भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक दिल्ली और आसपास के इलाकों से कई फॉल्ट होकर गुजरते हैं। इन फॉल्ट लाइनों में दिल्ली-मुरादाबाद फॉल्ट, दिल्ली-हरिद्वार और सोहना फॉल्ट मुख्य है। विशेषज्ञों का कहना है कि फॉल्ट जोन वह इलाके होते हैं, जिनमें चट्टानें अलग-अलग दिशा में गति कर रही होती हैं। इन फॉल्ट लाइनों में रिक्टर पैमाने पर 6 की तीव्रता का भूकंप पैदा करने की क्षमता होती है। सबसे ज्यादा संवेदनशील गुरुग्राम है जिसके आसपास सात फॉल्ट लाइन मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर 8 से अधिक तीव्रता का भूकंप आया तो शहर में करीब 80 फीसदी भवन ध्वस्त हो सकते हैं।
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इन क्षेत्रों में खतरा ज्यादा
केंद्रीय भू विज्ञान मंत्रालय की एक पुरानी स्टडी के अनुसार, यमुना की बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्र में उन स्थानों को चिह्नित किया है जहां भूकंप का खतरा सबसे अधिक है। इनमें पूर्वी दिल्ली के घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों को शामिल किया गया हैं। इसके अलावा खतरे वाले इलाकों में सरिता विहार, पश्चिम विहार, वजीराबाद, करोल बाग और जनकपुरी हैं।
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