सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक बार से फिर से फरीदाबाद नगर निगम से कहा है कि वन क्षेत्र में स्थित तमाम अवैध निर्माण को ढहाया जाना चाहिए चाहे वह फार्म हाउस हो या कुछ और। शीर्ष अदालत ने कहा है कि अतिक्रमण हटाने का काम 23 अगस्त तक पूरा हो जाना चाहिए। कोर्ट ने सुनवाई 25 अगस्त को तय करते हुए आयुक्त को इसकी स्टेटस रिपोर्ट भी पेश करने का निर्देश दिया। इसमें पुनर्वास संबंधी मुद्दे को भी शामिल करने के लिए कहा।
जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष खोरी गांव के निवासियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्विस ने कहा कि सिर्फ गरीबों के मकानों को गिराया जा रहा है और अमीर लोगों को छोड़ दिया जा रहा है। इस पर पीठ ने कहा कि हमारा आदेश स्पष्ट है कि वन क्षेत्र के तमाम अवैध निर्माणों को हटाया जाना चाहिए चाहे वह गरीबों का मकान हो या अमीरों का फार्म हाउस।
हरियाणा की ओर से पेश वकील ने बताया कि वन क्षेत्र से अवैध अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई अब पूरी होने वाली है। उन्होंने यह भी बताया कि पुनर्वास नीति पर भी काम चल रहा है। इस संबंध में मिले सुझावों पर गौर करने के बाद इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। दो-तीन हफ्ते में इसे अंतिम रूप देने की उम्मीद है।
इस पर वरिष्ठ वकील संजय पारिख ने कहा कि निगम ने नई नीति बना कर सरकार के पास भेज दी है। उन्होंने कहा कि नई नीति में भी कुछ नहीं बदला है। बिजली बिल आदि अब भी मांगने की बात है। गोंसाल्विस ने भी कहा कि नीति बहुत ही खराब है। इस पर पीठ ने वकीलों से कहा कि पॉलिसी आने तो दीजिए। आप पॉलिसी आने पर चुनौती दे सकते हैं। पीठ ने कहा कि जो पुनर्वास के योग्य होंगे, उन पर विचार किया जाएगा। जो योग्य नहीं होंगे उन पर कैसे विचार किया जाएगा कमिश्नर इन सभी बातों पर गौर करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने निगम से यह भी कहा है कि वह राधेश्याम कॉम्प्लेक्स में नोडल अधिकारी को बैठाने पर विचार करे, खोरी गांव के उन लोगों की शिकायतें सुने जिनके मकान ढहाये गए हैं। लोगों का कहना है कि उनके पास सिर छुपाने की जगह नहीं है।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने सात जून को फरीदाबाद निगम को खोरी गांव के वन क्षेत्र में स्थित करीब 10 हजार घरों को छह हफ्ते के भीतर ढहाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि हर हालत में वन क्षेत्र खाली होना चाहिए और इसमें किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
सरकार अपने हाथ नहीं झाड़ सकती
एक वकील ने कहा कि जिन लोगों के मकान तोड़े गए हैं उनके लिए बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जाएं ताकि वे वहां रह सकें। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश अनुरूप लोगों ने निगम आयुक्त को ज्ञापन दिया था। उन्हें राधा स्वामी सत्संग या रेड क्रॉस के पास जाने के लिए कहा गया। सरकार को कुछ न कुछ करना चाहिए। वे इस तरह अपने हाथ नहीं झाड़ सकते। इनमें कई महिलाएं जिनके छोटे बच्चे हैं। इनके लिए अस्थाई व्यवस्था होनी चाहिए।
वहीं दूसरी ओर निगम की ओर से पेश वकील ने कहा कि बेड, शौचालय और भोजन की व्यवस्था पहले से की जा चुकी है। वहां पर रहने वाले 50 फीसदी लोग किराएदार थे, वे चले गए हैं। उनमें से अधिकांश प्रवासी थे। शेष लोगों के लिए राधा स्वामी सत्संग और रेड क्रॉस में व्यवस्था है। अगर किसी को शिकायत है तो वह निगम आयुक्त से संपर्क कर सकता है।
जब लोगों की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि राधा स्वामी परिसर भी वन क्षेत्र की जमीन पर है। इसका निगम की ओर से पेश वकील ने विरोध करते हुए इसे गलत बताया। सुप्रीम कोर्ट ने लोगों की शिकायतों के समाधान और उपलब्ध सुविधाओं का उनके द्वारा इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए निगम आयुक्त को राधा स्वामी सत्संग परिसर में एक अतिरिक्त कार्यालय बनाने पर विचार करने के लिए कहा है।
समारोह स्थल के संबंध में सुनवाई
कोर्ट ने उन लोगों के आवेदन पर भी विचार किया जिनकी वहां जमीनें हैं और जिनका प्रयोग शादी समारोह आयोजित करने के लिए किया जाता है। आवेदक के वकील ने कहा कि कोर्ट ने उन्हें एक अन्य मामले में एनजीटी के आदेश के खिलाफ राहत प्रदान की थी। लेकिन अब उन्हें नोटिस देकर चार दिनों के भीतर चारदीवारी तोड़ने की बात कही जा रही है।
खंडपीठ ने कहा कि अगर ये स्थान वन क्षेत्र की भूमि पर है तो निकाय को हमारे आदेश का पालन करना होगा। उनका सरोकार केवल वन क्षेत्र पर बने अनाधिकृत निर्माण से है। इस मामले की सुनवाई अन्य याचिकाओं के साथ छह अगस्त को की जाएगी।
खंडपीठ ने कहा कि अगर उक्त निर्माण वन क्षेत्र पर है तो वे कार्यवाही करें और अगर नहीं है तो अगली तारीख तय यथा स्थिति बरकरार रखें। आवेदक अपने दावों से संबंधित दस्तावेज अधिकारियों के समक्ष पेश करने के लिए स्वतंत्र हैं ताकि वे उन पर विचार कर सकें।