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Delhi: ओवरलोड वाहनों को एसटीए ने दी बड़ी राहत, 90 नहीं अब 7 दिन में होगी रिहाई, लंबी प्रक्रिया से बच सकेंगे

Mon, 06 Jul 2026 05:07 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

ओवरलोड वाणिज्यिक वाहन मालिकों को दिल्ली में बड़ी राहत मिली है। अब ऐसे मामलों में वाहन सिर्फ सात दिन तक जब्त रहेगा, जबकि पहले 90 दिन तक जब्ती का प्रावधान था।
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ओवरलोड वाहन - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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ओवरलोड वाणिज्यिक वाहन मालिकों को दिल्ली में बड़ी राहत मिली है। अब ऐसे मामलों में वाहन सिर्फ सात दिन तक जब्त रहेगा, जबकि पहले 90 दिन तक जब्ती का प्रावधान था। दिल्ली राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) ने तय किया है कि 15 हजार रुपये का कंपाउंडिंग शुल्क जमा कर परमिट निलंबन या निरस्तीकरण की लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से भी बचा जा सकेगा। 

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विभाग ने कहा कि इससे लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण होगा, जबकि ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी। मौजूदा व्यवस्था के तहत मोटर वाहन अधिनियम की धारा 194 के अनुसार ओवरलोड वाहन पकड़े जाने पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है।  इसके अलावा प्रत्येक अतिरिक्त टन भार पर दो हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी देना पड़ता है। वहीं, अधिनियम की धारा 86 के तहत वाहन का परमिट निलंबित करने और वाहन को 90 दिन तक जब्त रखने का भी प्रावधान है। लंबी जब्ती अवधि के कारण ट्रांसपोर्टरों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था और बड़ी संख्या में मामले लंबित बने रहते थे। एसटीए की हालिया बैठक में इस व्यवस्था की समीक्षा की गई। प्राधिकरण ने पाया कि ओवरलोडिंग से जुड़े मामलों का निस्तारण सात दिनों के भीतर करने के निर्देश पहले से हैं। 

इसी आधार पर वाहन जब्ती  की अवधि 90 दिन से घटाकर सात दिन करने का फैसला लिया गया। साथ ही मोटर वाहन अधिनियम की धारा 86(5) के तहत उपलब्ध प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए परमिट निलंबन या निरस्तीकरण के स्थान पर कंपाउंडिंग राशि वसूलने का विकल्प लागू करने को मंजूरी दी गई। 
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ओवरलोडिंग का जुर्माना पहले जैसा 
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ओवरलोडिंग पर लगने वाला मूल जुर्माना और अतिरिक्त भार के अनुसार वसूला जाने वाला जुर्माना पहले की तरह लागू रहेगा। बैठक में शुरुआत में कंपाउंडिंग शुल्क 10 हजार रुपये प्रस्तावित किया गया था, लेकिन विचार-विमर्श के बाद इसे बढ़ाकर 15 हजार रुपये तय किया गया। परिवहन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह राहत बिना शर्त नहीं होगी। यदि कोई परमिट धारक कंपाउंडिंग शुल्क जमा नहीं करता है तो वाहन सात दिन तक जब्त रहेगा। इसके बाद भी मोटर वाहन अधिनियम के तहत परमिट निलंबन समेत अन्य कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों के अनुसार बदलाव का उद्देश्य ओवरलोडिंग को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया को सरल, प्रभावी और समयबद्ध बनाना है।

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