नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने एक युवती को परेशान करने के उद्देश्य से तीन फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाने के आरोप को गंभीर माना है। अदालत ने युवती व आरोपी के बीच हुए समझौते के आधार पर फिलहाल दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की अपेक्षा आरोपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने माना कि संभवत: युवती ने परेशानी से बचने के लिए दबाव में समझौता किया हो क्योंकि कोई भी लड़की हर रोज थाने नहीं आना चाहती।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि ऐसे मामलों में आरोपियों को नहीं छोड़ा जा सकता। अदालत ने तुरंत प्राथमिकी रद्द करने की अपेक्षा आरोपी को शपथपत्र सहित स्पष्ट करने का निर्देश दिया है उसने युवती के नाम से बनाए फेसबुक फर्जी खातों को हटा दिया है। आरोपी ने कहा इस आधार पर एफआईआर को रद्द किया जाए कि उसका शिकायतकर्ता से समझौता हो गया है।
अदालत ने कहा कि यह संभव है कि इस तरह के समझौते दबाव के कारण होते हैं। हो सकता है कि शिकायतकर्ता को परेशान किया जा रहा हो और उसने समझौता कर लिया हो।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कुछ फर्जी फेसबुक खाते अभी भी चालू हैं और शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि उसे याचिकाकर्ता से लगातार खतरा है कि वह और अधिक फर्जी आईडी बनाएगा। अदालत ने आरोपी को हलफनामा दायर करने का निर्देश देते हुए कहा कि उसने फेसबुक पर बनाए गए सभी फर्जी खातों को बंद कर दिया है या नहीं।
हालांकि याचिकाकर्ता ने हलफनामा दायर कर कहा कि वह किसी भी तरह से महिला को परेशान नहीं करेगा। यह भी कहा कि उसने बाकी दो फर्जी खातों को बंद कर दिया है। अदालत ने पुलिस को इसे सत्यापित कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी का प्रयोग किया। वहीं जांच अधिकारी ने बताया कि सभी फर्जी खाते ब्लाक कर दिए गए हैं।