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राष्ट्रीय हिंदी मूट कोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार रमेश अवस्थी ने हिंदी को बढ़ावा देने पर दिया जोर

Thu, 25 Mar 2021 09:38 PM IST
Vikas Kumar अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

-अदालती कार्यशैली मे छात्र-छात्राओं को राष्ट्रभाषा के नजदीक लाने के लिए हिंदी का प्रयोग आवश्यकता
 
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रमेश अवस्थी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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एमिटी विश्वविद्यालय में आयोजित 'राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता' का समापन हो गया। प्रतियोगिता में विधि विशेषज्ञों द्वारा छात्र-छात्राओं को कोर्ट में हुए फैसलों के बारे में विस्तार से बताया गया। समारोह को वेबिनार के जरिए राम भवन मिश्रा (जस्टिस इलाहाबाद उच्च न्यायालय), रविन्द्र सिंह (जस्टिस इलाहाबाद उच्च न्यायालय), एके पटनायक(न्यायिक सदस्य और एचओडी केन्द्रीय प्रशासनिक सदस्य, कटक) और हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी दिल्ली के संस्थापक अध्यक्ष सुधाकर पाठक ने संयुक्त रूप से संबोधित किया। इन सभी ने समारोह में हिंदी को बढ़ावा देने और वकालत के पेशे में इसके प्रयोग की वकालत की।

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समारोह में शामिल हुए वरिष्ठ पत्रकार रमेश अवस्थी ने भी हिंदी को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी को आगे बढ़ाने में राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन जी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। कुछ विचारकों के अनुसार स्वतंत्रता प्राप्त करना उनका पहला साध्य था। हिंदी को वे साधन मानते थे। उनका मानना था कि यदि हिंदी भारतीय स्वतंत्रता के आड़े आएगी तो मैं स्वयं उसका गला घोंट दूंगा। वे हिंदी को देश की आजादी के पहले आजादी प्राप्त करने का साधन मानते रहे और आजादी मिलने के बाद आजादी को बनाए रखने का। 

रमेश अवस्थी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में हिंदी को उसका सम्मान वापस मिल रहा है। सरकारी कार्यालयों से लेकर हर तरफ हिंदी में कामकाज को प्राथमिकता मिल रही है। सरकार हिंदी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर भी काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वकालत के पेश मे हिंदी भाषा का अत्यन्त महत्व है। अदालती कार्यशैली मे छात्र-छात्राओं को राष्ट्रभाषा के नजदीक लाने के लिए हिंदी का प्रयोग आवश्यकता है। उन्होने आह्वान किया कि हम सब मिलकर हिंदी को विश्व के शिखर पर ले जाएं और हिंदी को सर्वव्यापक और शक्तिशाली बनाने में अपना योगदान दें। इसके लिए केवल बात सेमिनार और वेबिनार तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए।

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