शिक्षा निदेशालय ने निर्देश दिए हैं कि स्कूल खुलने के बाद बच्चों पर एक सप्ताह तक किताबें लाने का दबाव न बनाया जाए। उनके मनोरंजन के लिए विभिन्न गतिविधियों को शामिल करने के लिए भी कहा है।
निदेशालय ने कहा है कि स्कूल खुलने पर शिक्षकों को बच्चों व उनके साथ पहुंचे अभिभावकों का गर्मजोशी के साथ स्वागत करना होगा। कक्षा में पहुंचने पर शिक्षक बच्चों से उनके लॉकडाउन के समय का अनुभव साझा करने के लिए कहेंगे। यदि कोई बच्चा अपना अनुभव साझा करने में असहज महसूस करेगा तो शिक्षक उस पर दबाव नहीं बनाएंगे। वहीं, बच्चों के जोड़े के साथ समूह का गठन किया जाएगा, जिससे बच्चे खुलकर अपनी बात रख सकें।
छात्रों को कविता या चित्र के माध्यम से भी उनके लॉकडाउन का अनुभव साझा करने के लिए कहा जा सकता है। निदेशालय ने शिक्षकों को कक्षा छह से आठ तक के छात्र-छात्राओं के साथ उनकी आशाओं, अपेक्षाओं और आकांक्षाओं के बारे में बात करने का निर्देश दिया है। वहीं, छात्रों को करीब दो सप्ताह तक आमने-सामने अनौपचारिक चर्चा करने का निर्देश है।
20 गतिविधियां आयोजित करेंगे स्कूल : शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों द्वारा बच्चों को सहज महसूस कराने और संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए 20 तरह की गतिविधियां शामिल करने का निर्देश दिया है। इसके तहत दयालुता, कृतज्ञता, भावनात्मक पहलू, सुनो और कूदो, काल्पनिक गेंद, नमस्कार, काला या सफेद, अच्छे अनुभव, शब्दों का एकीकरण, यू आर यूनिक, फेस गेम व नाम में क्या रखा है, जैसी गतिविधियों को शामिल करना होगा। इसके तहत छात्रों को उनके अच्छे अनुभव से लेकर परेशानियों को साझा करने के लिए कहा जाएगा।