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दिल्ली: आपातकालीन इस्तेमाल के लिए स्कूलों में बनेंगे क्वांरटीन रूम, डीडीएमए की एसओपी जारी

Mon, 30 Aug 2021 11:19 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

गाइडलाइन में स्पष्ट तौर कहा गया है कि कोरोना के लक्षण मिलने पर छात्र व स्टॉफ को अन्य लोगों से दूर कर क्वारंटीन सेंटर में भेजा जाए। वहीं, इसकी तत्काल जानकारी स्कूल प्रमुख को देनी होगी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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दिल्ली में एक सितंबर से खुलने जा रहे स्कूल, कॉलेज व कोचिंग संस्थानों के लिए दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण(डीडीएमए) ने गाइडलाइंस जारी की हैं। इसमें कहा गया है कि नौवीं से बारहवीं तक की कक्षाओं के बच्चों के लिए स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थान, स्किल डेवलपमेंट, प्रशिक्षण संस्थान और लाइब्रेरी खुलेंगी। 
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सभी शैक्षिक संस्थानों को अपने परिसर में आपातकालीन इस्तेमाल के लिए क्वारंटीन रुम बनाने होंगे। छात्रों को अभिभावकों की सहमति से ही स्कूल बुलाया जाएगा। इसके लिए सहमति पत्र का प्रारुप भी जारी किया गया है।

गाइडलाइन में स्पष्ट तौर कहा गया है कि कोरोना के लक्षण मिलने पर छात्र व स्टॉफ को अन्य लोगों से दूर कर क्वारंटीन सेंटर में भेजा जाए। वहीं, इसकी तत्काल जानकारी स्कूल प्रमुख को देनी होगी। डीडीएमए के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्कूलों को सभी कक्षाओं की उपस्थिति सीमा और कोरोना बचाव से जुड़े नियमों के मुताबिक टाइम टेबल तैयार करना होगा। 
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एक कक्षा के अंदर अधिकतम 50 फीसदी बच्चों के उपस्थित रहने की मंजूरी होगी। लंच ब्रेक एक साथ नहीं दिया जाएगा। लंच आदान-प्रदान पर रोक रहेगी, स्कूलों को खुले स्थान पर ही लंच करने का इंतजाम करना होगा। जहां वह अपना मॉस्क उतार सकेंगे। स्कूल प्रमखों को सुनिश्चित करना होगा सभी शिक्षकों व कर्मचारियों का वैक्सीनेशन हो। मालूम हो कि बीते सप्ताह ही दिल्ली सरकार ने विशेषज्ञ समिति के आधार पर नौवीं से बारहवीं तक की कक्षाओं के लिए स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थान व लाइब्रेरी खोलने की अनुमति दी है।
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बच्चों की काउंसलिंग की जाए

शिक्षकों को यह सुनिश्चित करना है कि वे प्रत्येक छात्र से बात करें और उनकी भलाई के बारे में पूछें। उन्हें छात्र को परामर्श और भावनात्मक सहयोग प्रदान करना होगा। चूंकि बच्चे लंबे अंतराल के बाद स्कूल पहुंचेंगे।

ऐसे में बच्चों को सीखने की गतिविधियों के लिए मानसिक रूप से तैयार कर उसके बाद शैक्षणिक गतिविधियों को फिर से शुरु करना होगा। शिक्षकों को अपने छात्रों के वर्तमान शैक्षणिक स्तर को समझना होगा। भावनात्मक सहयोग देते हुए छात्रों को सीखने के लिए धीरे-धीरे तैयार करना होगा। 

एसओपी में कही गई अन्य बातें
  • स्कूल परिसर में कोरोना संक्रमण केलक्ष्ण वाले किसी बच्चे या स्टॉफ को आने की इजाजत नहीं होगी
  • स्कूल के एंट्री गेट पर ही अनिवार्य रुप से थर्मल स्क्रीनिंग जरुरी होगी।
  • स्कूल केगेट, कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और जनसुविधाओं वाली जगहों पर हाथ सेनिटाइज करने की व्यवस्था करना अनिवार्य है।
  • विद्यार्थियों को बताया जाए कि वह किताबें, कॉपी और स्टेशनरी व अन्य वस्तुओ को साझा ना करें।
  • कंटेनमेंट जोन में रहने वाले विद्यार्थी, शिक्षक, कर्मचारी स्कूल नहीं आ सकेंगे।
  • बच्चों केएक ग्रुप के स्कूल से निकलने के बाद दूसरे ग्रुप के आने के बीच एक घंटे का अंतराल जरुरी है। 
  • स्कूल के गेट पर भीड़ ना हो इसका ध्यान रखा जाए, सामाजिक दूरी का पालन करवाया जाए।  
  • स्कूल में नियमित अतिथि यात्राओं की मंजूरी नहीं होगी। आपात स्थिति के दौरान उचित कोविड उपयुक्त व्यवहार के साथ माता-पिता को आने की अनुमति होगी। 
  • आने-जाने के लिए अलग-अलग जगह तय की जाए। 
  • सभी प्रमुख स्थानों जैसे क्लास रूम, वॉशरूम पार्किंग, प्रवेश और निकास आदि पर पोस्टर संदेश प्रदर्शित किए जाएं, जिससे कि कोविड उपयुक्त व्यवहार जैसे शारीरिक दूरी और मास्क दिशा निर्देश आदि सुनिश्चित किया जा सके।
  • स्कूल प्रमुख को सुनिश्चित करना होगा कि मॉस्क, सैनिटाइजेशन, थर्मल स्कैनर, साबुन का पर्याप्त इंतजाम हो। 
  • संस्थान के स्टॉफ को वैक्सीन लगी हो, इस बात का भी ध्यान रखना होगा। 
  • स्कूल प्रमुख को सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों व स्टॉफ के लिए इस्तेमाल होने वाली बसों व वैन में प्रतिदिन सैनिटाइजेशन की व्यवस्था की जाए। वहीं इस बात का ध्यान रखना होगा कि बस केड्राइवर व सहायक को वैक्सीन लगी हो। 
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