यूक्रेन में लगातार बमबारी के बीच अभी भी सैंकड़ों भारतीय छात्र फंसे हुए हैं। इनका खाना खत्म हो चुका है। वहीं अधिकांश छात्रों के फोन भी अब बंद आने लगे हैं। ऐसे में छात्रों ने खुद ही एक दूसरे की तलाश कर सेफ हाऊस तक पहुंचने की पहल शुरू की है।
मंगलवार को करीब 500 किलोमीटर दूर पौलेंड बॉर्डर पर पहुंचे छात्रों ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि अभी भी सैंकड़ों छात्र लापता हैं। यूक्रेन के खारकीव और कीव क्षेत्र में भारतीय छात्र काफी संख्या में हैं लेकिन ज्यादातर की लोकेशन के बारे में जानकारी किसी के पास नहीं है।
दिल्ली के रोहिणी निवासी 21 वर्षीय सुमित सचदेवा ने बताया कि वे मंगलवार सुबह ही पौलेंड बॉर्डर तक पहुंचे हैं। उनके अभी भी चार दोस्त लापता हैं। बीते कुछ दिन से सभी छात्र परेशान हैं क्योंकि कोई भी मदद नहीं हो पा रही है। ऐसे में कौन कहां पर है? इसके बारे में भी जानकारी नहीं है।
दोस्तों की तलाश के लिए सोशल नेटवर्किंग काम आ रहा है। सुमित ने कहा, ‘ज्यादातर लोगों के फोन अब बंद आने लगे हैं लेकिन कुछ-कुछ फोन चार्ज हैं। सोशल नेटवर्किंग, लोकल वाट्सग्रुप और सोशल चैटिंग साइट्स के जरिए एक दूसरे की तलाश कर रहे हैं। अभी मेरे चार दोस्त खारकीव में हैं। उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। उन्हें बॉर्डर तक ला पाना भी काफी मुश्किल है।’
सोशल साइट ट्विटर पर एसओएस इंडिया अकाउंट से इन सभी लापता छात्रों के बारे में पोस्ट भी किया जा रहा है। साथ ही टेलीग्राम पर बने ग्रुप के जरिए भी एक दूसरे तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
सुमित के अलावा दिल्ली के ही आदित्य गौड़ ने बताया कि वे यूक्रेन की निप्रो मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्र हैं और उनकी यूनिवर्सिटी में 400 से ज्यादा भारतीय छात्र हैं। भारत ने चार बॉर्डर से छात्रों को ले जाने की पहल की है लेकिन उनकी यूनिवर्सिटी से वहां तक जाने का कोई साधन नहीं है।
इनके बीच करीब 500 किलोमीटर से भी अधिक दूरी है। उनके पास सात से आठ घंटे का पानी और खाना ही बचा है। कभी भी सायरन बज जाता है। कुछ लोग कह रहे हैं कि हाथ में तिरंगा लेकर बाहर निकल जाएं लेकिन बाहर चारों ओर तोप, सेना और बम गिरने की आवाज ही सुनाई दे रही है।
हंगरी बॉर्डर पहुंचने से पहले लापता छात्र
आदित्य ने बताया कि दिप्यान नाथ और रुहित नाथ सोमवार से लापता हैं। वे काफी मुश्किलों के बीच हंगरी बॉर्डर के लिए रवाना हुए थे। उनकी आखिरी बार जब फोन पर बात हुई तो रुहित ने उन्हें बताया कि कुछ पुलिस वालों ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया है लेकिन उसके 24 घंटे बाद भी संपर्क नहीं हुआ है।
इसी तरह दिल्ली के आशीष चौधरी भी अब तक पौलेंड बॉर्डर पर नहीं पहुंचे हैं। उनकी लास्ट लोकेशन बॉर्डर से कुछ दूरी पर थी। इनके अलावा टेरणोपिल यूनिवर्सिटी के छात्र आयुष गंगवार रोमानिया बॉर्डर पर अब तक नहीं पहुंच पाए हैं। इन्हें लेकर यूक्रेन के लोकल ग्रुप में काफी मैसेज भी फॉरवर्ड किए जा रहे हैं।