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Delhi News: भ्रष्टाचार पर रार...आतिशी ने ईडी से फिर पूछे पांच सवाल

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कहा-शराब कारोबारी रेड्डी से भाजपा को मिले 55 करोड़, ईडी ने क्या जांच की
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में कथित शराब घोटाले पर राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही है। आम आदमी पार्टी और भाजपा इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने एक बार फिर ईडी से पांच सवाल पूछकर आरोप पर सवाल उठाया है। वहीं भाजपा ने इस मुद्दे पर आतिशी से पूछा है कि जब आबकारी नीति में अनियमितता नहीं थी तो शराब नीति की सीबीआई जांच के आदेश होते ही इस नीति को सरकार ने क्यों वापस ले लिया।
आतिशी ने शनिवार को ईडी से पांच सवाल किए। आतिशी ने कहा कि साउथ लॉबी के शराब कारोबारी शरथ चंद रेड्डी से भाजपा को 55 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके पुख्ता प्रमाण आने के 16 दिन में ईडी ने क्या जांच की है? कितने समन भेजे? कितनी रेड की? कितनी गिरफ्तारियां की? उन्होंने कहा कि मनी ट्रेल की आशंका मात्र पर ईडी ने कई आप नेताओं को गिरफ्तार किया, आप को आरोपी बनाने की बात की, अब जब 55 करोड़ रुपये की मनी ट्रेल सीधे शराब कारोबारियों से भाजपा को जा रही है तो ईडी भाजपा को आरोपी कब तक बनाएगी।
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आतिशी ने कहा कि मनी ट्रेल मिलने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को समन कब जाएगा? उनके यहां रेड कब होगी? उनकी गिरफ्तारी कब होगी? उन्होंने कहा कि साउथ लॉबी के शराब कारोबारी मागूंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी और राघव मगुंटा के चुनाव लड़ने के एवज में पैसा भाजपा के एलायंस पार्टनर टीडीपी को गया है? ईडी इसकी जांच कब करेगी। भाजपा के एलायंस पार्टनर टीडीपी से शराब कारोबारी मागूंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी खुद चुनाव लड़ रहे है, क्या ईडी इस चुनाव में हो रहे खर्च की जांच कर रही है?
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रोज फर्जी कहानी गढ़ती हैं आतिशी : सचदेवा
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि रोजाना दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी फर्जी कहानी गढ़ती हैं। हर सुबह वह उठकर अपने अपशब्दों से नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर देती हैं। शराब घोटाले पर वह जो झूठ बोलती रहती हैं, वह सब केजरीवाल सरकार की बचाव रणनीति के तहत शराब घोटाले की सुनवाई कर रही अदालत में रखा गया था, लेकिन उनकी एक भी बात अदालत में नहीं टिक सकी, जिसके परिणामस्वरूप सीएम अरविंद केजरीवाल सहित सभी आरोपियों को जेल जाना पड़ा। सचदेवा ने यह भी कहा कि 2022 के गोवा और पंजाब चुनावों के लिए आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए अरविंद केजरीवाल सरकार ने शराब व्यापारी कार्टेल के साथ मिलकर शराब नीति का मसौदा तैयार किया और थोक व्यापारियों के कमीशन को 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया। किक बैक का पैसा 2022 में दो राज्यों में नकद लिया गया और चुनावों में खर्च किया गया। सचदेवा ने कहा कि आतिशी को बताना चाहिए कि अगर शराब नीति में कोई अनियमितता नहीं थी तो शराब नीति की सीबीआई जांच के आदेश होते ही केजरीवाल सरकार ने इसे वापस क्यों ले लिया। शराब घोटाला एक खुला मामला है, अब तक यह मामला अपने फैसले के चरण तक पहुंच गया होता यदि अरविंद केजरीवाल ने देरी की रणनीति के लिए जनता के पैसे से कांग्रेसी वकीलों की फौज न खड़ी की होती।
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