एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने कहा कि इसरो द्वारा तैयार किए गए प्रोटोकॉल के आधार पर एक रिपोर्ट के अनुसार, धान के अवशेष जलाने की घटनाओं में पंजाब में 69.49 प्रतिशत, हरियाणा में 18.28 प्रतिशत और 47.61 प्रतिशत की कमी आई है।
पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के आठ एनसीआर जिलों में पराली जलाने की घटनाओं की संख्या में इस साल काफी कमी आई है। इस महीने कुल 1795 मामसे सामने आए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 4854 मामले दर्ज किए गए। केंद्र की वायु गुणवत्ता आयोग ने शुक्रवार को यह जानकारी दी है।
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एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने कहा कि इसरो द्वारा तैयार किए गए प्रोटोकॉल के आधार पर एक रिपोर्ट के अनुसार, धान के अवशेष जलाने की घटनाओं में पंजाब में 69.49 प्रतिशत, हरियाणा में 18.28 प्रतिशत और 47.61 प्रतिशत की कमी आई है।
आयोग ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के आठ एनसीआर जिलों में धान के अवशेष जलाने के मामलों में इस वर्ष काफी कमी आई है। पिछले साल की तुलना में 2021 में आग लगने के कम मामले दर्ज किए गए। 14 अक्तूबर तक एक महीने में पराली जलाने की कुल 1,795 मामले दर्ज किए गए। 2020 में इसी अवधि के दौरान दर्ज की गयी 4,854 घटनाओं से कम हैं। प्रवर्तन एजेंसियों ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों में अभी तक 663 घटनास्थलों का निरीक्षण किया।
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उसने बताया कि 252 मामलों में पर्यावरणीय हर्जाना लगाया गया। मौजूदा वर्ष में इसी अवधि में पंजाब में पराली जलाने की 1,286 घटनाएं आयीं, जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान 4,216 घटनाएं दर्ज की गयी थीं। हरियाणा में ऐसी 487 घटनाएं आयीं जबकि पिछले साल इसी अवधि में 596 घटनाएं आयी थीं। इस अवधि के दौरान उत्तर प्रदेश के आठ एनसीआर जिलों से पराली जलाने की 22 घटनाएं दर्ज की गयी जबकि पिछले साल 42 घटनाएं आयी थीं।दिल्ली और राजस्थान के दो एनसीआर जिलों से पराली जलाने की कोई घटना सामने नहीं आयी।