राकेश टिकैत, भारतीय किसान यूनिन
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देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण किसानों ने भी अपनी रणनीति बदल ली है। राजधानी के तीनों धरनास्थलों पर भले ही इस समय भीड़ कम नजर आ रही हो, लेकिन इसके पीछे संयुक्त किसान मोर्चा की विस्मयकारी योजना है। भाकियू किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने उसका खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि धरनास्थलों पर अब भीड़ के बजाय शिफ्टों में किसान बुलाए जाएंगे। क्योंकि, सरकार कोरोना का बहाना बनाकर धरने समाप्त कराना चाहती हैं। किसी भी सूरत में सरकारों को खुद पर हावी नहीं होने देंगे। यूपी, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, राजस्थान आदि राज्यों के गांवों में टीमें तैयार हैं। जरूरत पड़ी तो एक आह्वान पर लाखों किसान दिल्ली पहुंच जाएंगे। दावा किया कि कोरोना और आंदोलन का एक-दूसरे से कोई वास्ता नहीं है।
नए कृषि कानूनों को रद्द कराने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी की मांग को लेकर करीब पांच माह से किसान गाजीपुर, सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं। वह स्पष्ट कर चुके हैं कि मांगें पूरी हुए बगैर वह नहीं लौटेंगे। उधर, केंद्र सरकार भी कई दौर की असफल बातचीत के बाद खामोश है।
भाजपा नेताओं को सुतिया देंगे...
गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे टिकैत ने कहा कि सरकारें पांच साल चलती हैं तो धरना भी यूं ही चलेगा। केंद्र की भाजपा सरकार मांग पूरी नहीं करती है तो आगामी चुनाव में इसका जवाब दिया जाएगा। गांवों में जाने वाले भाजपा नेताओं को किसान सुतिया देंगे। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भाजपा नेताओं का विरोध भी हो चुका है।
10 मई तक खाली हो जाएंगे किसान
टिकैत ने कहा कि फिलहाल धरनास्थलों पर इसलिए भी भीड़ कम है कि किसान खेती और गृहस्थी दोनों संभाल रहे हैं। 10 मई से गेहूं कटाई, गन्ना बुआई और कटाई समेत अन्य काम खत्म हो जाएंगे। इसके बाद गांववार लोग बुलाए जाएंगे। कुछ दिन धरनास्थलों पर रहने के बाद वह वापस चले जाएंगे और फिर दूसरे गांव से आएंगे। यह क्रम मांगें माने जाने तक चलता रहेगा।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के साथ धोखा
राकेश टिकैत ने कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के साथ धोखा हुआ है। आरोप लगाया कि भाजपा ने वहां ममता के वोटरों को रुपये बांटे और उनकी उंगली पर स्याही से निशान लगा दिया। जब मतदाता वोट डालने के लिए पहुंचे तो उनकी उंगली पर पहले से निशान था। इसलिए उन्हें ममता के पक्ष में वोट ही नहीं डालने दिया गया। इस तरह के कई मामलों का पश्चिम बंगाल में खुलासा हुआ है।
मुझे दूसरी डोज नहीं मिल रही...
टिकैत ने कहा...‘देश में इतना बुरा हाल है कि अस्पतालों में बिस्तर नहीं, ऑक्सीजन नहीं, वैक्सीन तक नहीं। मुझे खुद दूसरी डोज नहीं मिल पा रही है। सवाल उठाया कि कोरोना का इलाज कराने जो भी मरीज अस्पताल जाता है वह मर जाता है। कहीं यह इंटरनेशनल फंडिंग तो नहीं है। इसके पीछे कोई बड़ी साजिश भी हो सकती है।’