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जंतर-मंतर भड़काऊ नारेबाजी: पिंकी चौधरी 17 सितंबर तक रहेगा न्यायिक हिरासत में, जज बोले- हम तालिबान राज्य नहीं यहां कानून का राज

Thu, 02 Sep 2021 09:42 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अदालत ने पिंकी चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि हम तालिबान राज्य नहीं हैं। अदालत ने कहा था कि अतीत में इस तरह की घटनाओं ने सांप्रदायिक तनाव भड़काया है जिससे दंगे हुए हैं और जान-माल का नुकसान हुआ है। 
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पिंकी चौधरी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अदालत ने जंतर-मंतर पर भड़काऊ नारेबाजी के मामले में आरोपी हिंदू रक्षक दल के अध्यक्ष भूपिंदर तोमर उर्फ पिंकी चौधरी को 17 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। उसे बुधवार को एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया था। उसने मंगलवार को पुलिस के समक्ष समर्पण किया था।

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आरोपी पिंकी चौधरी की रिमांड अवधि खत्म होने पर विडियों कांफ्रेंसिग के जरिए मैट्रोपोपोलिटन मजिस्ट्रेट प्रयंक नायक के समक्ष पेश किया गया। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच जारी है और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करना है ऐसे में आरोपी पिंकी चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा जाए। अदालत ने पुलिस के आवेदन को स्वीकार करते हुए आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

निचली अदालत द्वारा पिंकी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी गई और उसके बाद हाईकोर्ट ने भी उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि आरोपी पर गंभीर आरोप है और प्रथम दृष्टया साक्ष्यों से स्पष्ट है कि उसने भडकाऊ भाषण देकर दो सममुदायों के बीच शत्रुता पैदा करने की कोशिश की है और मामले की गंभीरता को देखते हुए उससे हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
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अदालत ने पिंकी चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि हम तालिबान राज्य नहीं हैं। अदालत ने कहा था कि अतीत में इस तरह की घटनाओं ने सांप्रदायिक तनाव भड़काया है जिससे दंगे हुए हैं और जान-माल का नुकसान हुआ है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि हम तालिबान राज्य नहीं हैं यहां कानून का राज, हमारे बहुसांस्कृतिक और बहुलतावादी समुदाय के शासन का पवित्र सिद्धांत है। आज जब पूरा भारत 'आजादी का अमृत महोत्सव' मना रहा है तब कुछ ऐसे लोग हैं जो अब भी असहिष्णु और स्वकेन्द्रित मानसिकता में जकड़े हुए हैं।
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अदालत ने कहा था कि जो साक्ष्य उपलब्ध हैं उससे मामले में आरोपी की संलिप्तता प्रथम दृष्टया स्पष्ट है और आरोपी पर लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।

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