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दिल्ली दंगा : ताहिर हुसैन पर लगाए यूएपीए प्रावधानों को पुलिस ने उचित ठहराया

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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने कहा कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन पर लगाए यूएपीए प्रावधानों को चुनौती देना मुकदमे को रोकने का प्रयास है। पुलिस ने हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क हुसैन की याचिका पर रखा। हुसैन ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के मामले में मुकदमा चलाने की मंजूरी देने को चुनौती दी है।
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न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने पुलिस को सभी तथ्यों को रिकार्ड पर रखने का निर्देश देते हुए सुनवाई 29 नवंबर तय कर दी।
विशेष सेल के पुलिस उपायुक्त की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है, यह बहुतायत से स्पष्ट है कि याचिका ट्रायल को शॉर्ट सर्किट करने और उसे रोकने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है। ऐसे में मंजूरी देने पर डाले गए किसी भी आक्षेप को केवल निचली अदालत द्वारा देखा जा सकता है और यह रिट इस अदालत के दायरे में नहीं आती।
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अमित महाजन और रजत नायर ने दावा किया कि इस प्रकार की याचिका उच्च न्यायालय के समक्ष दायर नहीं की जा सकती। इसलिए याचिका खारिज की जाए। उन्होंने कहा निचली अदालत ने 17 सितंबर 20 को आरोपपत्र पर संज्ञान लिया और याचिकाकर्ता ने इसे चुनौती नहीं दी है।
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उन्होंने कहा वर्तमान याचिका कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। याचिका निराधार, मनगढ़ंत और बेतुके तथ्यों और परिस्थितियों पर दायर की गई है।
अदालत ने 23 जुलाई को हुसैन की उस याचिका पर पुलिस से जवाब मांगा था। इसमें सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की कथित बड़ी साजिश से संबंधित मामले में आरोपपत्र में उन पर लगाए गए यूएपीए के प्रावधानों को चुनौती दी थी।
वकील सुजीत कुमार गुप्ता जरिये दायर याचिका में हुसैन ने तर्क रखा है कि उनके खिलाफ यूएपीए प्रावधान लागू नहीं होते। याचिका में यूएपीए के तहत दर्ज मामले में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने को भी चुनौती दी गई है।
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