जस्टिस फॉर ऑल नामक सामाजिक संगठन ने अधिवक्ता खगेश बी झा के माध्यम से दायर याचिका में दिल्ली सरकार को आरटीई अधिनियम के प्रावधानों के तहत ईडब्ल्यूएस व अन्य से संबंधित 44 हजार से अधिक बच्चों के प्रवेश को सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
उच्च न्यायालय में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित समूहों के बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलवाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होगी।
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जस्टिस फॉर ऑल नामक सामाजिक संगठन ने अधिवक्ता खगेश बी झा के माध्यम से दायर याचिका में दिल्ली सरकार को आरटीई अधिनियम के प्रावधानों के तहत ईडब्ल्यूएस व अन्य से संबंधित 44 हजार से अधिक बच्चों के प्रवेश को सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याची ने कहा कहस तय नियमों के तहत ये बच्चे इन सीटों पर दाखिले के हकदार है।
याची ने कहा कि शिक्षा निदेशक को उन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया जाए जो अपने स्कूलों में छात्रों को आवंटित सीटों पर दाखिला नहीं दे रहे। उन्होंने कहा शिक्षा निदेशालय आरटीई अधिनियम के तहत अपने कर्तव्य का पालन करने और बच्चों के प्रवेश की प्रक्रिया की निगरानी करने के लिए वाध्द्घ है।
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मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर किसी अन्य पीठ के समक्ष शुक्रवार को सुनवाई तय की है।
याचिका में कहा गया है कि सत्र 2021-22 के लिए अप्रैल 2021 के महीने में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले बच्चों में से लगभग 50,000 स्कूल में वर्तमान नामांकन के अनुसार प्रवेश के हकदार हैं। याची ने कहा शिक्षा निदेशक ने दाखिला प्रक्रिया में देरी की और अब देरी के आधार पर प्रवेश से इनकार करना बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है।