केंद्र सरकार को कोविड-19 के चलते 12 वर्ष और उससे कम आयु वर्ग के बच्चों के टीकाकरण के लिए एक रोड मैप देने का निर्देश देने का आग्रह करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। अदालत ने याचिका पर सुनवाई 12 मार्च तय की है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष यह याचिका एक 12 वर्षीय लड़की और एक अन्य ने दायर की है। याची की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश वासुदेव ने तर्क रखा कि वर्तमान में केवल 15-17 उम्र के बच्चों को टीकाकरण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 12 साल और उससे कम उम्र के बच्चों को टीकाकरण का कोई रोडमैप नहीं दिया है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि वह सरकार को 12 साल और उससे कम उम्र के बच्चों के टीकाकरण के लिए एक रोड मैप देने का निर्देश दे, क्योंकि आशंका है कि कोविड-19 की तीसरी लहर उन्हें और अधिक प्रभावित कर सकती है।
18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को जल्दी से टीका लगाया जाए
उच्च न्यायालय ने हाल ही में कहा था कि यह एक 'आपदा' होगी, यदि कोविड के टीके, विशेष रूप से बच्चों को, बिना नैदानिक परीक्षणों के दिए जाते हैं। अदालत ने केंद्र से कहा था कि परीक्षण समाप्त होने के बाद 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को जल्दी से टीका लगाया जाए, राष्ट्र इसका इंतजार कर रहा है। केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा था कि टीकाकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए कम से कम समय में 100 प्रतिशत टीकाकरण के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं। कोविड टीकाकरण रणनीति के तहत, दिल्ली में रहने वाले बच्चों के माता-पिता सहित 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिक पहले से ही टीकाकरण के लिए पात्र है।
स्वस्थ स्वयंसेवकों पर क्लिनिकल परीक्षण करने की अनुमति दी
केंद्र ने पिछले वर्ष अदालत को बताया था कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने भारत बायोटेक को अपने वैक्सीन-कोवाक्सिन के लिए 2 से 18 साल की उम्र के स्वस्थ स्वयंसेवकों पर क्लिनिकल परीक्षण करने की अनुमति दी है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि विभिन्न देशों में 8 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों को टीके लगाए जा रहे हैं और अदालत अधिकारियों से समयबद्ध तरीके से प्रक्रिया समाप्त करने के लिए कह सकती है। याचिका में 17 वर्ष तक के बच्चों के माता-पिता के टीकाकरण को प्राथमिकता देने की भी मांग की गई है, क्योंकि दूसरी लहर के दौरान उनके माता-पिता के कोविड -19 के कारण कई बच्चे अनाथ हो गए थे।