अदालत ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ नाबालिग पहलवान के यौन उत्पीड़न मामले में शिकायतकर्ता और उसके पिता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने दोनों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न पुलिस द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया जाए। पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश छवि कपूर ने कार्यवाही के दौरान पीड़ित/शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया और उन्हें 1 अगस्त तक पुलिस रिपोर्ट पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने पुलिस द्वारा बृजभूषण के खिलाफ पोक्सो अधिनियम के तहत दर्ज प्राथमिकी पर दायर क्लोजर रिपोर्ट पर विचार किया और उसके बाद शिकायतकर्ता से जवाब मांगा। अदालत ने कहा कि दोनों का जवाब आने के बाद ही वे रिपोर्ट पर विचार करेंगे। पुलिस ने दायर रिपोर्ट में पीड़िता के धारा 164 के तहत दिए बयानों का हवाला देते हुए कहा है कि पीड़िता ने पहले लगाए गए आरोपों का समर्थन नहीं किया है। पीड़िता के बयानों के आधार पर बृज भूषण के खिलाफ पोक्सों के तहत मामला नहीं बनता ऐसे में इस मामले को बंद किया जाए। दिल्ली पुलिस ने 15 जून को अदालत के समक्ष एक रिपोर्ट दायर कर मामले को रद्द करने की मांग की थी।
जानें क्या है पूरा मामला
पुलिस ने आरोप लगाने वाली ज्यादातर महिला पहलवानों के बयान दर्ज कर लिए थे। ऐसे में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सभी की निगाह टिकी थी। पहलवानों ने दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना देकर बृजभूषण शरण सिंह पर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद नई संसद के बाहर पंचायत करने जाते हुए पहलवानों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई कर दी थी। उसके बाद मामला बिगड़ता चला गया था। इस पर पहले गृह मंत्री अमित शाह व बाद में खेल मंत्री से मुलाकात के बाद मामले में बातचीत का दौर शुरू हुआ था।