सूत्रों का कहना है कि दिलीप पाकिस्तान के नंबरों पर वर्दी पहनकर वीडियो और ऑडियो कॉल करता था। उसके मोबाइल से इसके सबूत मिले हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि आरोपी ने देश की महत्वपूर्ण जानकारियां पाक खुफिया एजेंसी या उसके एजेंटों को सौंप दी हैं, इसकी पड़ताल की जा रही है।
खुद को सेना में कैप्टन बताने वाले सिक्योरिटी गार्ड दिलीप कुमार के हावभाव से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई भी उसके झांसे में आ गई। आईएसआई नकली कैप्टन शेखर को सेना का असली अधिकारी समझ बैठी और उसने दिलीप को हनीट्रेप में फंसा लिया।
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सूत्रों का कहना है कि दिलीप पाकिस्तान के नंबरों पर वर्दी पहनकर वीडियो और ऑडियो कॉल करता था। उसके मोबाइल से इसके सबूत मिले हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि आरोपी ने देश की महत्वपूर्ण जानकारियां पाक खुफिया एजेंसी या उसके एजेंटों को सौंप दी हैं, इसकी पड़ताल की जा रही है। हालांकि दक्षिण जिला के पुलिस उपायुक्त अतुल कुमार ठाकुर इन सभी खबरों से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि आरोपी पाक की खुफिया एजेंसी के संपर्क में नहीं था। फिलहाल शनिवार को उसे अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया। अब उससे पूछताछ जारी है।
सूत्रों का कहना है कि नकली कैप्टन शेखर के मोबाइल से पुलिस को कई पाकिस्तानी नंबर मिले हैं। आरोपी शेखर लगातार इनके संपर्क में था। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने शेखर को असली सेना अधिकारी समझकर उसकी कई लड़कियों से दोस्ती करवा दी थी। लगातार वह उनके संपर्क में भी था। पुलिस ने देश की सभी सुरक्षा एजेंसियों को इसकी जानकारी भी दे दी है।
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सूत्रों का कहना है कि नकली कैप्टन से मिलेट्री इंटेलिजेंस के अलावा स्पेशल सेल और आईबी की टीम पूछताछ कर रही है। उसके मोबाइल से डाटा रिकवरी के लिए उसे एफएसएल लैब भेजा गया है। इसके अलावा उसके सोशल मीडिया अकाउंट की बारीकी से जांच की जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि इस बात की आशंका कम ही है कि नकली सेना अधिकारी ने देश का महत्वपूर्ण डाटा पड़ोसी देश की खुफिया एजेंसी को दिया हो, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसकी भी जांच करना चाहती हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि ऐसा लगता है कि बस मौज मस्ती करने के लिए ही आरोपी लड़कियों से दोस्ती करता था। लेकिन विदेशी लिंक आने के बाद इसकी पूरी पड़ताल की जाएगी।