कोरोना से ठीक होने के बाद भी काफी लोगों में लक्षण नहीं जा रहे हैं। किसी को सांस फूलने की परेशानी है तो किसी को बुखार या गले में दर्द रहने की परेशानी है। इन दिनों राजधानी के अस्पतालों में पोस्ट कोविड के मामले भी काफी देखने को मिल रहे हैं। इसी के तहत राजधानी के आयुष पोस्ट कोविड केंद्र में भी मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के अधीन प्रशांत विहार स्थित आयुर्वेदिक पंचकर्मा अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरपी पाराशर ने बताया कि दो सप्ताह पहले यह केंद्र शुरू किया गया था, जहां अब रोजाना 50 से अधिक मामले देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोविड से ठीक होने के बाद जहां फेफड़ों से संबंधित पलमोनरी एंबॉलिज्म, न्यूमोथोरेक्स, फेफड़ों की टीबी और अस्पर्जिलोमा (सेकेंडरी फंगल इन्फेक्शन) के मामले सामने आ रहे हैं।
हार्ट से संबंधित स्ट्रोक, कार्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर और वायरल मायोकार्डाइटिस जैसे रोगों के मामले भी कम नहीं है। कोरोना संक्रमण से पहले पूर्ण रूप से स्वस्थ काफी व्यक्तियों को डायबिटीज का दंश झेलना पड़ रहा है। अगर लोग अनिद्रा, तनाव, डिप्रेशन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं तो खुजली, चकत्ते व एलर्जी जैसे त्वचा रोगों के रोगियों की संख्या भी अच्छी खासी है।
उन्होंने बताया कि अभी देश में ऐसी कोई जांच नहीं है जिसके आधार पर पता लगाया जा सके कि कोरोना से शरीर का कौन सा अंग प्रभावित हुआ है। मरीज को भविष्य में विषाणुओं की वजह से क्या बीमारी हो सकती है? इसके बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। पहली लहर के दौरान पोस्ट कोविड के मामले काफी सीमित थे लेकिन दूसरी लहर के बाद यह स्थिति काफी गंभीर हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि पोस्ट कोविड रोगियों को तत्काल चिकित्सीय परामर्श लेना जरूरी है। छोटी-छोटी परेशानी को नजरदांज करना भी उचित नहीं है। क्योंकि, चिकित्सीय विज्ञान में इसके दुष्प्रभावों के बारे में बहुत कुछ जानकारी नहीं है। डॉ. पाराशर ने दावा किया कि पोस्ट कोविड रोगों में आयुर्वेदिक चिकित्सा पूर्णत: प्रभावी है।