20 मेट्रो ट्रेनों के साथ-साथ मशीनों का रखरखाव आधुनिक तकनीक से किया जाएगा। अभी तक इसके रखरखाव का जिम्मा दिल्ली मेट्रो के पास था। डीएमआरसी ने इसके लिए टेंडर के बाद दो अंतरराष्ट्रीय बोली दाताओं को चुना है। साल के अंत तक इस डिपो में कार्य शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन के समयपुर बादली डिपो की जिम्मेदारी निजी एजेंसी में सौंपने की तैयारी है। इसके तहत 20 मेट्रो ट्रेनों के साथ-साथ मशीनों का रखरखाव आधुनिक तकनीक से किया जाएगा।
विज्ञापन
अभी तक इसके रखरखाव का जिम्मा दिल्ली मेट्रो के पास था। डीएमआरसी ने इसके लिए टेंडर के बाद दो अंतरराष्ट्रीय बोली दाताओं को चुना है। साल के अंत तक इस डिपो में कार्य शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
दिल्ली मेट्रो ने पायलट परियोजना के तौर पर दुनिया के दूसरे महानगरों में अपनाई जा रही नवीनतम तकनीक आधारित रखरखाव की दिशा में पहल की है। यह दिल्ली मेट्रो की तरफ से किसी भी डिपो के लिए पहली बार की जाने वाली पहल है। इससे जनशक्ति के कुशल उपयोग के साथ साथ रखरखाव लागत में कमी आएगी। डिपो की सेवाओं की आउट सोर्सिंग के बाद वहां कार्यरत कर्मियों को मेट्रो फेज-4 परियोजनाओं के डिपो में तैनात किया जाएगा।
विज्ञापन
यात्रियों का सफर होगा सुलभ
परिचालन और डिपो के परिचालन का जिम्मा निजी एजेंसी को सौंपने के बाद येलो लाइन पर हुडा सिटी सेंटर-समयपुर बादली के बीच मेट्रो का सफर और सुलभ हो जाएगा। किसी भी तकनीकी खराबी या येलो लाइन पर मेट्रो की आकस्मिक जरूरतों को नजदीकी डिपो से जल्द से जल्द पूरा किया जा सकेगा।
मेट्रो की फ्रिक्वेंसी पर किसी भी बाधा के कारण सेवाएं प्रभावित न हो इस लिहाज से डिपो की उपयोगिता सर्वाधिक है। दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन पर 49.31 किलोमीटर के दायरे में 37 स्टेशन हैं।
यलो लाइन की अधिकतर सेवाएं हुईं आउटसोर्स
डीएमआरसी ने पिछले साल दिल्ली मेट्रो रेल अकादमी में प्रशिक्षण के बाद 70 ट्रेन ऑपरेटरों को येलो लाइन पर तैनात कर दिया था। दूसरे चरणों में कुल 153 ट्रेन ऑपरेटरों को ट्रेनिंग के बाद ड्यूटी पर लगाए जा रहे हैं। परिचालन के बाद रखरखाव और साफ सफाई सहित दूसरी संबंधित गतिविधियां भी आउटसोर्स करने से येलो लाइन की अधिकतर कार्य निजी हाथों में होगी। वित्तीय बोझ कम करने की दिशा में की जा रही इस पहल को निजीकरण की तरफ बढ़ते कदम के तौर पर देखा जा रहा है।