नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया का कहना है कि गैर कोविड रोगियों को भी घर बैठे उपचार मिलना चाहिए। यह सेवा उन्हें ई- संजीवनी टेलीकंसल्टेशन के जरिए मिल सकती है। मगर अधिकांश लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं है। इस पर पंजीयन करने के बाद आसपास के अस्पताल के डॉक्टर से वीडियो चैट के जरिए संपर्क किया जा सकता है।
शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित सीजीएचएस मुख्यालय ई-संजीवनी टेलीकंसल्टेशन सुविधा का निरीक्षण करने पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री ने उन सत्रों को देखा जहां परामर्श करने वाले डॉक्टरों ने टेली-परामर्श प्रदान की। मरीजों से बुखार, नाक बहने और शरीर में दर्द जैसी बीमारियों के बारे में पूछताछ की। उन्हें क्या जांच करानी चाहिए? इसके बारे में डॉक्टरों ने सलाह भी दी। इसमें एक बुजुर्ग हृदय रोगी भी शामिल रहे, जो चिकित्सा परामर्श के लिए घर से बाहर नहीं जा सकते थे। चिकित्सक ने आवश्यक चिकित्सा परीक्षण निर्धारित किए और लाभार्थी द्वारा ली जा रही दवा की समीक्षा की।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कोविड जैसी महामारी की स्थिति में टेली-परामर्श विशेष रूप से प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक वरदान है। ई-संजीवनी स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांति है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कल्पना के अनुसार सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य देखभाल प्रदान कर रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कई राज्यों में लोगों ने ई-संजीवनी के लाभों को जल्दी से पहचाना है। यह शहरी और ग्रामीणों में मौजूद डिजिटल स्वास्थ्य विभाजन को भी खत्म कर रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों को हब-स्पोक मॉडल के माध्यम से विषय विशेषज्ञों और विशेषज्ञों से परामर्श लेने की सिफारिश भी की।
दरअसल ई-संजीवनी भारत सरकार की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा है, जो दूरस्थ चिकित्सक परामर्श को सक्षम करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का लाभ उठाता है। इसे दो मोड में संचालित किया जा रहा है। ई-संजीवनी आयुष्मान भारत स्वास्थ्य केंद्र और दूसरी ओपीडी है। देश भर में लगभग 33,297 स्वास्थ्य केंद्र अलग-अलग जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों से जुड़े हुए हैं। इसकी ओपीडी सेवा के जरिए अब तक 35 राज्यों में 65 लाख से भी ज्यादा मरीज लाभ ले चुके हैं। उन्होंने दिल्ली सहित पूरे देश के मरीजों से इसका लाभ लेने की अपील की है।