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Delhi News: स्वच्छ गंगा मिशन की धीमी प्रगति पर नाराज एनजीटी

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चार सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का दिया निर्देश, 10 फरवरी को होगी अगली सुनवाई
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने स्वच्छ गंगा मिशन की प्रगति को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान एनएमसीजी के वकील ने अदालत को बताया कि गंगा और उसकी सहायक नदियों वाले राज्यों और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से मांगी गई रिपोर्ट अभी तक नहीं मिल सकी हैं। एनएमसीजी ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा। एनजीटी ने समय तो दे दिया, लेकिन रिपोर्टों की देरी पर नाराजगी भी जताई। इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को होगी।

यह मामला एक मीडिया रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसमें स्वच्छ गंगा मिशन प्रमुख ने परियोजनाओं पर खर्च की गति को बेहद धीमा बताया था। इसी रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने स्वयं संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया था। सुनवाई के दौरान अधिकरण ने वर्षा जल नालों (स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स) में सीवेज जोड़ने या उनसे पानी लेने की अनुमति पर भी गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि इस तरह की किसी भी कोशिश से वर्षा जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होगी, बरसात के समय नालों के ओवरफ्लो का खतरा बढ़ेगा और यह उन अदालती आदेशों का सीधा उल्लंघन होगा, जिनमें साफ तौर पर वर्षा जल नालों में सीवेज डालने पर प्रतिबंध लगाया गया है। अदालत ने यह भी चिंता जताई कि बारिश के मौसम में कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) ओवरफ्लो हो जाते हैं, जिससे बिना उपचारित गंदा पानी नदियों और प्राकृतिक जलधाराओं में बहने लगता है।
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इसके अलावा, एनजीटी ने गंगा और उसकी सहायक नदियों के फ्लडप्लेन क्षेत्रों में एसटीपी स्थापित किए जाने पर भी सवाल उठाए। अधिकरण ने एनएमसीजी से स्पष्ट करने को कहा कि क्या किसी फ्लडप्लेन में एसटीपी लगाने की अनुमति दी गई है। क्या ऐसे किसी प्लांट को एनएमसीजी द्वारा वित्तीय सहायता दी गई है। साथ ही, एनएमसीजी को यह जानकारी भी देनी होगी कि गंगा और उसकी सहायक नदियों के किन क्षेत्रों में फ्लडप्लेन का औपचारिक सीमांकन किया जा चुका है। अदालत ने इन सभी बिंदुओं पर पूरी और तथ्यात्मक रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर जमा करने का निर्देश दिया है।
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