आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने प्रदूषण से बचने के लिए दिल्ली के पड़ोसी राज्यों के द्वारा पेश किया गया प्लान अस्वीकार कर दिया है। इससे साफ होता है कि पड़ोसी राज्यों ने अपने यहां प्रदूषण से निपटने के लिए उचित उपाय नहीं किए हैं।
अगर कोरोना की तीसरी लहर आती है और इस दौरान प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी रहती है तो यह दिल्ली वालों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि समय रहते पराली प्रबंधन की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए अन्यथा पराली जलाने से पैदा हुए प्रदूषण के कारण गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
प्रदूषण के कारकों पर अध्ययन करने वाली संस्था सफर की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में होने वाले कुल प्रदूषण का 45 प्रतिशत पड़ोसी राज्यों के कारण हो सकता है। आप नेता सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि अब मानसून का समय खत्म होने जा रहा है और अब किसान अपने खेतों में अगली फसल को बोने के लिए खेतों को खाली करने का काम करेंगे।
लेकिन अभी तक किसी भी राज्य द्वारा किसानों की पराली के लिए कोई योजना पेश नहीं की है। इससे मजबूर होकर किसान पराली जलाएंगे और हर साल की तरह दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर में प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो सकती है। उन्होंने कहा कि राज्यों के द्वारा समय रहते पराली प्रबंधन पर ठोस योजना पेश करनी चाहिए।
दिल्ली ने बनाया था प्लान
वहीं, दिल्ली सरकार ने पूसा के वैज्ञानिकों से मिलकर एक विशेष डिकंपोजर बनाने में सफलता हासिल की थी जो पराली को नष्ट करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। इससे किसानों को कोई आर्थिक नुकसान भी नहीं होता है और इस मशीन और दवाओं का पूरा खर्च दिल्ली सरकार उठाती है। दिल्ली सरकार का कहना है कि इस योजना का लाभ पड़ोसी राज्यों की सरकारों को भी अपने किसानों के लिए पेश किया जाए तो इससे बेहतर राह निकल सकती है।