नई दिल्ली। रोहिणी कोर्ट में हुई गोलीबारी के छह दिन बाद हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा कि अदालतों में पर्याप्त संख्या में पुलिस कर्मियों की उचित और प्रभावी तैनाती की जरूरत है। अदालत ने केंद्र, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने सभी से अदालतों में सुरक्षा बनाए रखने के मुद्दे पर जवाब दाखिल करने के साथ पुख्ता सुरक्षा के संबंध में सुझाव देने का भी निर्देश दिया है।
पीठ ने कहा, यह मामला काफी गंभीर है। रोहिणी कोर्ट में हुई घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सभी से दिल्ली की सभी अदालत परिसरों में सुरक्षा के लिए प्रतिवादियों से बहुमूल्य सुझाव चाहते है। पीठ ने कहा कि अदालतों में पुख्ता तरीके से प्रवेश प्रणाली, मेटल डिटेक्टर लगाने, वाहन निगरानी प्रणाली के तहत और पुलिस कर्मियों को उचित प्रशिक्षण देने की जरूरत है।
सुरक्षा के मुद्दे पर लंबित याचिका पर जल्द सुनवाई की अपील
इससे पहले जिला अदालतों में सुरक्षा व्यवस्था करने के मुद्दे पर लंबित याचिका पर अधिवक्ता रिचा सिंह ने रोहिणी कोर्ट में गोलीबारी का उल्लेख करते हुए 2019 से लंबित एक याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए आवेदन दिया था। उन्होंने कहा अदालत परिसर में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था का निर्देश दिए जाए, जहां अपराध की घटनाएं हुई हैं।
जिला अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पिछले साल सितंबर में हाईकोर्ट रजिस्ट्री ने पीठ को बताया था कि सुरक्षा की बढ़ती जरूरत के चलते रोहिणी कोर्ट परिसर में पुलिस की तैनाती बढ़ाने की जरूरत है। इतना ही नहीं कोर्ट परिसर में पर्याप्त संख्या में कैमरे लगाने की जरूरत है। यह मामला अभी लंबित है और कैमरों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव दिल्ली सरकार के पास लंबित है। हाईकोर्ट रजिस्ट्री ने हाईकोर्ट के समक्ष सात जिला अदालतों में सुरक्षा बढ़ाने की मांग वाली याचिका के संबंध में यह जवाब दायर किया था।
यह मामला रोहिणी अदालत के बिल्डिंग मेंटेनेंस कमेटी ने उठाया था और कमेटी ने सीसीटीवी कैमरे लगाने की मंजूरी दे दी थी। यह मामला दिल्ली सरकार की प्रशासनिक मंजूरी और वित्तीय मंजूरी के लिए भेजा गया था। यह सरकार के पास अभी भी लंबित है और इस संबंध में बार-बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद अभी तक सरकार का कोई जवाब नहीं आया।